मैनपुर (गरियाबंद)। गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम कोयबा का उप स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। क्षेत्र के उदंती, कोयबा, खासरबाहरा, बमहिनीझोला और आमड़ सहित पांच गांवों के करीब 2,500 से अधिक ग्रामीण इस स्वास्थ्य केंद्र पर इलाज के लिए निर्भर हैं, लेकिन यहां आवश्यक दवाइयों की कमी के कारण मरीजों को पर्याप्त उपचार नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी उन्हें निजी मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं, जिससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार उप स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर (आरएचओ) की उपलब्धता राहत की बात है, लेकिन दवाइयों का नियमित स्टॉक नहीं होने से मरीजों को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा। बुखार, सर्दी-जुकाम और अन्य सामान्य बीमारियों के मरीज भी दवा के लिए बाजार का रुख करने को मजबूर हैं।
एक कमरे से चल रहा पूरा स्वास्थ्य केंद्र
ग्रामीणों ने बताया कि कोयबा उप स्वास्थ्य केंद्र का नया भवन करीब एक वर्ष से अधूरा पड़ा हुआ है। निर्माण कार्य बीच में ही रुक जाने के कारण पूरा स्वास्थ्य केंद्र फिलहाल केवल एक कमरे से संचालित किया जा रहा है। सीमित स्थान होने से मरीजों के बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं है। वहीं टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं तथा अन्य नियमित स्वास्थ्य गतिविधियां भी संसाधनों के अभाव में संचालित हो रही हैं।
पांच गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित
कोयबा उप स्वास्थ्य केंद्र आसपास के पांच गांवों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा का प्रमुख केंद्र है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यहां पर्याप्त दवाइयां और आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं होंगे, तो स्वास्थ्य केंद्र का उद्देश्य ही अधूरा रह जाएगा। उनका कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में दवाइयों की नियमित उपलब्धता सबसे जरूरी आवश्यकता है।
सीएचएमओ ने कहा— दवाइयां लाना स्थानीय जिम्मेदारी
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचएमओ) गरियाबंद डॉ. यू.एस.ए. नवरतने ने कहा कि कोयबा उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ आरएचओ को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मैनपुर से आवश्यक दवाइयां लानी चाहिए। यह उनकी जिम्मेदारी है। यदि दवाइयों की उपलब्धता में किसी प्रकार की समस्या है तो संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि यदि दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करना स्थानीय स्तर की जिम्मेदारी है, तो फिर मरीजों को दवा के अभाव में परेशान क्यों होना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जिम्मेदारी तय करने के बजाय स्वास्थ्य विभाग को नियमित दवा आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदने की मजबूरी न हो।
अधूरा भवन, सीमित संसाधन और दवाइयों की कमी के बीच कोयबा उप स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े पांच गांवों के हजारों ग्रामीण बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग केवल जिम्मेदारी तय करने तक सीमित रहता है या अधूरे भवन का निर्माण पूरा कर दवाइयों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाता है।







