पुलिस अधीक्षक गरियाबंद के निर्देशन में जिले के समस्त थानों द्वारा जमीनी स्तर पर आयोजित हुए विशेष कार्यक्रम
ग्रामीण अंचलों की महिलाओं को साइबर अपराधों के नुकसान और उनसे बचाव के सिखाए गए गुरु मंत्र
राधे पटेल / गरियाबंद गरियाबंद। अतिसंवेदनशील कहे जाने वाले गाव साहेबीन कछार में छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय के आह्वान पर पूरे प्रदेश में चलाए जा रहे ‘साइबर जागृति अभियान’ के अंतर्गत आज दिनांक 09 सितंबर 2026 को जिला गरियाबंद में एक वृहद जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर के विशेष निर्देशन में जिले के समस्त थानों द्वारा ग्रामीण स्तर पर सक्रिय आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं मितानीनों के लिए गांव-गांव में विशेष जागरूकता चौपाल और कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और परिवारों को तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति सचेत करना और उन्हें सुरक्षित डिजिटल व्यवहार सिखाना है।
गांव-गांव तक साइबर सुरक्षा का संदेश
आयोजित कार्यक्रमों में उपस्थित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानीनों और स्थानीय महिलाओं को साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले हथकंडों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। पुलिस टीमों ने विभिन्न थानों के अंतर्गत आने वाले ग्रामों में जाकर महिलाओं को बताया कि कैसे एक छोटी सी लापरवाही वित्तीय और मानसिक नुकसान का कारण बन सकती है।
महिलाओं को बताए गए साइबर अपराध से बचाव के मुख्य उपाय
- ओटीपी और पासवर्ड की गोपनीयता – किसी भी अज्ञात कॉलर या व्यक्ति के साथ अपना बैंक खाता नंबर, एटीएम पिन, यूपीआई पासवर्ड या ओटीपी (OTP) साझा न करें।
- संदिग्ध लिंक से दूरी – मोबाइल पर आने वाले लॉटरी, लोन या मुफ्त उपहार के प्रलोभन वाले अंजान लिंक पर क्लिक न करें।
- सोशल मीडिया सुरक्षा – अपनी निजी तस्वीरें और जानकारियां सोशल मीडिया पर अजनबियों से साझा न करें। अपनी प्रोफाइल को सुरक्षित रखें और मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें।
- सत्यापन की आदत – सरकारी योजनाओं, सब्सिडी या वित्तीय सहायता से जुड़े किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की सत्यता की जांच हमेशा आधिकारिक स्रोतों से ही करें।
मितानीन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बनेंगी ‘साइबर दूत’
पुलिस अधीक्षक ने अपने संदेश में कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मितानिन ग्रामीण समाज की रीढ़ हैं। उनकी हर घर तक सीधी पहुंच और मजबूत पकड़ होती है। इस कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षित किया गया है ताकि वे खुद सुरक्षित रहें और अपने-अपने क्षेत्रों के ग्रामीणों को भी साइबर ठगी के प्रति जागरूक कर ‘साइबर सखी’ या ‘साइबर दूत’ के रूप में भूमिका निभाएं।
तत्काल सहायता के लिए अपील
यदि कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार की ऑनलाइन धोखाधड़ी या साइबर अपराध का शिकार होता है, तो वह बिना डरे और बिना समय गंवाए तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या अपने नजदीकी थाने में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराएं। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, धोखाधड़ी की गई रकम को ब्लॉक करने की संभावना उतनी ही अधिक होगी।
गरियाबंद पुलिस का यह अभियान ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल सुरक्षा का पाठ पढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।




