राधे पटेल | गरियाबंदगरियाबंद। सरकारी राशन व्यवस्था में आई एक तकनीकी खराबी गरियाबंद जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति कमार-भुंजिया समुदाय के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम दांतबाय कला में उचित मूल्य की दुकान की पोस (e-POS) मशीन खराब होने के कारण सैकड़ों हितग्राहियों को राशन नहीं मिल पा रहा है। स्थिति ऐसी है कि जिन परिवारों का जीवन सरकारी राशन पर निर्भर है, वे अब खाद्यान्न संकट का सामना कर रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में करीब 470 राशन कार्डधारक परिवार हैं। इनमें से लगभग 150 राशन कार्ड दुकान में जमा हैं। लेकिन बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं होने के कारण राशन वितरण पूरी तरह प्रभावित हो गया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में हितग्राहियों की पहचान के लिए e-POS मशीन के माध्यम से अंगूठे और हथेली का मिलान अनिवार्य होता है। मशीन खराब होने से यह प्रक्रिया ठप पड़ गई है। e-POS प्रणाली का उद्देश्य पारदर्शिता और वास्तविक हितग्राहियों तक राशन पहुंचाना है, लेकिन तकनीकी बाधा आने पर पूरी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
अंगूठा नहीं मिल रहा, इसलिए राशन भी नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि कई दिनों से राशन वितरण नहीं हो पा रहा है। गरीब परिवारों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनके घर का चूल्हा सरकारी राशन पर निर्भर है। बरसात के मौसम में गांव से जिला मुख्यालय तक पहुंचना भी आसान नहीं है। ऐसे में राशन के लिए बार-बार चक्कर लगाना उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक और शारीरिक बोझ बन गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि तकनीकी खराबी दूर करने में देरी के कारण जरूरतमंद परिवारों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ रही है। उनका कहना है कि यदि मशीन खराब है तो विभाग को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर खाद्यान्न मिल सके।
मशीन सुधारने के 8 हजार रुपए पर विवाद
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब राशन दुकान संचालक मोहिंदर ध्रुव ने मशीन सुधारने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। संचालक के अनुसार मशीन खराब होने के बाद वे खाद्य विभाग कार्यालय पहुंचे, जहां मशीन सुधारने के लिए उनसे करीब 8 हजार रुपए की मांग की गई।
संचालक का आरोप है कि पूर्व में भी मशीन सुधारने के नाम पर भुगतान लिया गया था, लेकिन किसी प्रकार का बिल उपलब्ध नहीं कराया गया। उनका कहना है कि बिना बिल के भुगतान करना उचित नहीं है, इसलिए इस बार राशि जमा नहीं की गई। अब भुगतान को लेकर विवाद के चलते मशीन सुधारने में बाधा आने की बात सामने आ रही है।
मदर बोर्ड खराब या मशीन का ऊपरी हिस्सा?
मशीन की वास्तविक खराबी को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। प्लेसमेंट कर्मचारी का कहना है कि मशीन का मदर बोर्ड खराब था और उसे सुधार दिया गया है। वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सामान्यतः मशीन का बाहरी हिस्सा खराब होने पर उसका भुगतान करना पड़ता है, जबकि मदर बोर्ड जैसी तकनीकी खराबी की स्थिति में कंपनी की जिम्मेदारी तय होती है।
इसी विरोधाभास ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि मशीन की खराबी तकनीकी स्तर की थी, तो भुगतान किस आधार पर मांगा गया? और यदि भुगतान को लेकर विवाद है, तो उसका खामियाजा ग्रामीणों को क्यों भुगतना पड़ रहा है?
बरसात में बढ़ी चिंता, राशन ही जीवन का सहारा
दांतबाय कला जैसे दूरस्थ गांवों में रहने वाले कमार-भुंजिया समुदाय के परिवारों के लिए सरकारी राशन केवल एक योजना नहीं, बल्कि जीवनयापन का प्रमुख आधार है। बरसात के दिनों में रोजगार के अवसर सीमित हो जाते हैं और बाजार तक पहुंचना भी कठिन हो जाता है। ऐसे समय में राशन वितरण व्यवस्था का ठप होना ग्रामीणों की चिंता बढ़ा रहा है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खाद्य विभाग से मांग की है कि मशीन की खराबी को तत्काल दूर कर वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से राशन वितरण शुरू कराया जाए। साथ ही मशीन सुधारने के नाम पर भुगतान और तकनीकी विवाद की निष्पक्ष जांच भी की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

