गरियाबंद: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के अति संवेदनशील और नक्सल प्रभावित राजापड़ाव (मैनपुर) क्षेत्र में विकास के दावों की पोल मानसून की पहली बारिश ने ही खोल दी है। लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा करोड़ों की लागत से बनाई जा रही सड़क पहली ही बारिश में जलमग्न हो गई है। जब ग्रामीणों ने घटिया निर्माण और तकनीकी खामियों पर सवाल उठाए, तो PWD के इंजीनियर ने अपनी गलती सुधारने के बजाय उल्टे ग्रामीणों को ही झिड़क दिया।
महज 1.5 किलोमीटर सड़क के लिए 1.44 करोड़ का ‘बोगस एस्टीमेट’
मुख्य मार्ग से गरहाडीह बस्ती तक बनने वाली इस सड़क की लंबाई केवल 1.50 किलोमीटर है, जिसके लिए 1 करोड़ 44 लाख 80 हजार रुपए की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि इतनी बड़ी लागत से एक शानदार और टिकाऊ सड़क बनेगी, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
निर्माण कार्य अब भी अधूरा है और सड़क पर सिर्फ गिट्टी बिछी हुई है। इंजीनियर संजय यादव द्वारा बनाए गए इस ‘बोगस एस्टीमेट’ (Bogus Estimate) का ही नतीजा है कि करोड़ों खर्च होने के बाद भी क्षेत्र की जनता को 1.5 किलोमीटर की अधूरी सड़क ही नसीब हुई है।
इंजीनियर संजय यादव के बिगड़े बोल
जब जागरूक ग्रामीणों ने मौके पर मौजूद PWD इंजीनियर संजय यादव से निर्माण की गुणवत्ता और पानी भरने की समस्या पर सवाल किया, तो उनका जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना था। इंजीनियर ने अपना रौब झाड़ते हुए कहा- “मैं इंजीनियर हूं या आप?”
इंजीनियर ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अब यह काम पूरी बरसात अधूरा ही रहेगा और बारिश के बाद ही सड़क का निर्माण पूरा होगा। जलभराव की समस्या पर उनका लापरवाही भरा तर्क था कि “अभी सड़क पर डस्ट (Dust) गिरवा देंगे।”
STF फंड और बढ़ी हुई दरों (SOR) पर उठे गंभीर सवाल
नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम की मांग पर इस प्रोजेक्ट में STF (स्पेशल टास्क फोर्स) फंड को शामिल किया गया था। जोखिम भरे इलाके का हवाला देकर यहां सामान्य से अधिक SOR (Schedule of Rates) दरें स्वीकृत की गई थीं।
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि इन बढ़ी हुई दरों का फायदा आम जनता को नहीं, बल्कि निर्माण एजेंसी और ठेकेदारों को पहुंचाया जा रहा है। करोड़ों खर्च होने के बावजूद काम की गुणवत्ता बेहद निचले स्तर की है।
बिना जरूरत बना दी पुलिया, अब सड़क ही रोक रही पानी

ग्रामीणों ने बताया कि तकनीकी अनदेखी करते हुए मनमाने तरीके से ऐसे स्थानों पर पुलिया बना दी गई है, जहां उसकी कोई आवश्यकता ही नहीं थी। पानी के प्राकृतिक बहाव (Natural Flow) को ध्यान में न रखने का नतीजा यह हुआ है कि अब सड़क ही पानी रोकने का काम कर रही है। जलभराव के कारण सड़क के कटने और बहने का खतरा पैदा हो गया है।
इस प्रोजेक्ट से जुड़ी अन्य प्रमुख खामियां:
सुस्त रफ्तार और लापरवाही: मानसून आ चुका है, लेकिन निर्माण सामग्री अब भी सड़क पर भगवान भरोसे पड़ी है। काम इतना धीमा है कि बारिश में निर्माण की लागत और नुकसान दोनों बढ़ने की आशंका है।
सीमित दायरा: वन विभाग से NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) लेकर इस सड़क को गरहाडीह से आगे तक ले जाया जा सकता था। लेकिन अधिकारियों ने ऐसी कोई जहमत नहीं उठाई, जिससे एक बड़ी आबादी इस विकास कार्य के लाभ से वंचित रह गई।
ग्रामीणों की मांग: क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि 1.44 करोड़ की इस निर्माणाधीन सड़क की तत्काल स्वतंत्र तकनीकी जांच, गुणवत्ता परीक्षण और वित्तीय ऑडिट (Financial Audit) कराया जाए, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके।






