मैनपुर। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने ग्रामीण क्षेत्रों में कई कच्चे और निर्माणाधीन मकानों को नुकसान पहुंचाया है। इसी बीच गरियाबंद जिले के ग्राम जरहीडीह निवासी राकेश साहू का निर्माणाधीन आवास भी बारिश की मार नहीं झेल सका और भरभराकर गिर गया। इस घटना ने एक गरीब मजदूर के पक्के घर के सपने को फिर अधूरा छोड़ दिया है।
राकेश साहू वर्षों से अपने परिवार के साथ गांव में एक झोपड़ी में रहकर मजदूरी के सहारे जीवन-यापन कर रहे थे। जब उन्हें शासन की आवास योजना के तहत आर्थिक सहायता मिली, तो पूरे परिवार में खुशी का माहौल था। पहली और दूसरी किश्त मिलने के बाद उन्होंने अपने पक्के मकान का निर्माण शुरू कराया। धीरे-धीरे दीवारें खड़ी हुईं और परिवार को उम्मीद जगी कि अब बरसात और गर्मी से राहत मिलेगी।
लेकिन लगातार हो रही तेज बारिश ने उनकी सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। निर्माणाधीन मकान अचानक ढह गया, जिससे अब तक लगाया गया पैसा और मेहनत दोनों बर्बाद हो गए। राकेश साहू का कहना है कि यदि समय पर योजना की तीसरी किश्त मिल जाती, तो वह मकान की छत डालकर निर्माण पूरा कर लेते और शायद यह नुकसान नहीं होता।
अब मकान गिर जाने के बाद दोबारा निर्माण शुरू करने के लिए अतिरिक्त खर्च की जरूरत पड़ गई है, जिसे एक मजदूर परिवार के लिए जुटा पाना बेहद कठिन है। रोशन साहू का कहना है कि सरकार से मिली दो किश्तों का उपयोग पूरी ईमानदारी से मकान निर्माण में किया गया, लेकिन प्राकृतिक आपदा के कारण सब कुछ ढह गया। अब उनके सामने फिर से अपने परिवार के लिए सुरक्षित आशियाना बनाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
राकेश साहू ने जिला प्रशासन और शासन से अपील की है कि उनके मामले में विशेष संवेदनशीलता दिखाते हुए आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए तथा योजना की शेष राशि जल्द जारी की जाए, ताकि उनका अधूरा घर दोबारा बन सके। उनका कहना है कि यदि समय पर सहयोग मिल गया, तो उनका परिवार फिर से अपने पक्के घर के सपने को साकार कर सकेगा।
यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान निर्माणाधीन आवासों की सुरक्षा और समय पर योजना की किश्तों के भुगतान की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। स्थानीय ग्रामीणों का भी मानना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन को त्वरित राहत और विशेष सहायता उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि गरीब परिवारों के सपने अधूरे न रह जाएं।
प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष
“निर्माणाधीन आवास के गिरने पर सरकारी स्तर पर किसी तरह का मुआवजा प्रदान करने का कोई स्पष्ट नियम तो नहीं है। लेकिन यह एक गरीब परिवार से जुड़ा संवेदनशील मामला है, इसलिए मैं अपनी ओर से पूरी कोशिश करूंगा कि प्रशासन के स्तर पर उसकी कोई मदद हो सके, ताकि उस गरीब का घर बन सके।” – सुशील कुमार भोई, तहसीलदार, मैनपुर
“निर्माणाधीन आवास के क्षतिग्रस्त होने पर सीधे तौर पर मुआवजे का कोई प्रावधान तो नहीं है, लेकिन हम टीम भेजकर स्थल निरीक्षण कराएंगे और निर्माण की वर्तमान स्थिति देखेंगे। इसके बाद राजस्व विभाग से बात करके यदि मुआवजे का कोई भी प्रावधान बनता है, तो हम उस गरीब परिवार की मदद जरूर करेंगे।” – जितेश कुमार गजभिये, जनपद सीईओ, मैनपुर





