गरियाबंद। जिले के विभिन्न आश्रमों एवं छात्रावासों (हॉस्टलों) में वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। बुधवार को जिलेभर के 300 से अधिक कर्मचारी एकजुट होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी सात सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टर के नाम आदिवासी सहायक आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि पांच दिनों के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो वे 30 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठेंगे।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि वे पिछले 10 से 15 वर्षों से जिले के विभिन्न आश्रमों और छात्रावासों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इतने वर्षों तक लगातार कार्य करने के बावजूद उन्हें न तो नियमित किया गया और न ही उनकी नौकरी को लेकर कोई स्पष्ट नीति बनाई गई।
दो वर्षों से वेतन नहीं मिलने का आरोप
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कई कर्मचारियों को पिछले दो वर्षों से नियमित वेतन नहीं मिला है। इस संबंध में जिला प्रशासन एवं आदिवासी विकास विभाग को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। कर्मचारियों का कहना है कि वे लगातार कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, जबकि उनकी आर्थिक स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है।
नियुक्ति आदेश का वादा, लेकिन आज तक नहीं मिला दस्तावेज
कर्मचारियों ने बताया कि नियुक्ति के शुरुआती दौर में उन्हें नियुक्ति आदेश जारी करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी अधिकांश कर्मचारियों को कोई स्पष्ट नियुक्ति आदेश उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे उनके भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
तत्कालीन सहायक आयुक्त पर भी लगाए गंभीर आरोप
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि तत्कालीन सहायक आयुक्त नवीन भगत के कार्यकाल में जिले के कई आश्रमों एवं छात्रावासों में चपरासी सहित अन्य पदों पर भर्ती की गई थी। कर्मचारियों का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान उन्हें काम पर रखा गया, लेकिन वर्षों बाद भी कई कर्मचारियों को नियमित वेतन, सेवा सुरक्षा और अन्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाया। उनका कहना है कि अब उन्हीं कर्मचारियों को छात्रावासों से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
बिना सूचना कर्मचारियों को हटाने का आरोप
ज्ञापन में कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कई कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व सूचना के कार्य से हटा दिया गया। इससे प्रभावित कर्मचारी शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों तक सेवा लेने के बाद अब विभाग उनकी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रहा है।
2024 के आदेश का भी किया उल्लेख
कर्मचारियों ने अपने ज्ञापन में बताया कि आयुक्त आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग, नया रायपुर अटल नगर द्वारा 15 मई 2024 को जारी आदेश में कलेक्टर दर पर कार्यरत दैनिक वेतनभोगी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को रिक्त पदों पर युक्तियुक्तकरण एवं समायोजन करते हुए नियमित वेतनमान का लाभ देने का उल्लेख किया गया था। कर्मचारियों का आरोप है कि उक्त आदेश के बावजूद आज तक उन्हें इसका लाभ नहीं मिला। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण और वेतन संबंधी मुद्दे प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी समय-समय पर उठते रहे हैं।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो होगा बड़ा आंदोलन
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उनकी सात सूत्रीय मांगों पर पांच दिनों के भीतर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो 30 जून से जिलेभर के आश्रमों एवं छात्रावासों में कार्यरत कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करेंगे। कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से अपनी समस्याओं के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन अब उनके पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन कर्मचारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाता है और संभावित हड़ताल से पहले कोई समाधान निकल पाता है या नहीं।




दो वर्षों से वेतन नहीं मिलने का आरोप
नियुक्ति आदेश का वादा, लेकिन आज तक नहीं मिला दस्तावेज
