मैनपुर। जनपद पंचायत मुख्यालय मैनपुर का सामुदायिक भवन इन दिनों अपनी बदहाल स्थिति को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि जिस भवन में 24 जून 2026 को ग्राम सभा का आयोजन हुआ, जहां सालभर शासकीय बैठकें, सामाजिक कार्यक्रम, विवाह समारोह और जनसामान्य के आयोजन होते हैं, उसी भवन में गंदगी का अंबार देखने को मिल रहा है।
यह मैनपुर क्षेत्र का सबसे महत्वपूर्ण सामुदायिक भवन है। हर महीने यहां कई सामाजिक और शासकीय कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इसके बावजूद भवन परिसर की हालत देखकर ऐसा लगता है मानो महीनों से यहां सफाई ही नहीं हुई हो।
ग्राम सभा हुई, लेकिन गंदगी पर किसी की नजर नहीं गई?
24 जून को इसी भवन में ग्राम सभा आयोजित हुई। जनप्रतिनिधि आए, अधिकारी आए, कर्मचारी आए और सैकड़ों ग्रामीण भी पहुंचे। लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी जिम्मेदार अधिकारी की नजर भवन की बदहाल स्थिति पर नहीं पड़ी?
यदि पड़ी तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
और यदि नहीं पड़ी तो फिर निरीक्षण और समीक्षा बैठकों का औचित्य क्या है?
जब मेंटेनेंस के लिए पैसा आता है तो गंदगी क्यों?
सामुदायिक भवनों के रखरखाव और मरम्मत के लिए हर वर्ष भारी – भरकम राशि स्वीकृत होती है। इतना ही नहीं, शादी-विवाह और अन्य निजी कार्यक्रमों के लिए भवन आरक्षित कराने पर निर्धारित शुल्क भी लिया जाता है।
फिर सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि—
जब पैसा भी आ रहा है और किराया भी लिया जा रहा है, तो सफाई और रखरखाव आखिर क्यों नहीं हो रहा?
जनता से शुल्क पूरा, सुविधा आधी भी नहीं
लोगों को किसी कार्यक्रम के लिए भवन आरक्षित कराने जनपद पंचायत के चक्कर लगाने पड़ते हैं। निर्धारित शुल्क भी जमा करना पड़ता है। लेकिन जब कार्यक्रम के दिन भवन में पहुंचते हैं तो वहां गंदगी, अव्यवस्था और खराब व्यवस्थाएं उनका स्वागत करती हैं।
क्या जनता सिर्फ शुल्क जमा करने के लिए है?
क्या सुविधाएं देना विभाग की जिम्मेदारी नहीं?
आखिर जिम्मेदार कौन?
- भवन की नियमित सफाई कौन करता है?
- पिछले एक वर्ष में मेंटेनेंस पर कितनी राशि खर्च हुई?
- सफाई और मरम्मत का रिकॉर्ड क्या कहता है?
- क्या किसी अधिकारी ने हाल के महीनों में भवन का निरीक्षण किया?
- यदि किया तो गंदगी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जनता पूछ रही है सीधा सवाल
मैनपुर का यह सामुदायिक भवन केवल एक इमारत नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की सामाजिक गतिविधियों का केंद्र है। यहां गरीब परिवार अपनी बेटियों की शादी करते हैं, सामाजिक कार्यक्रम होते हैं और शासकीय बैठकें आयोजित की जाती हैं।
लेकिन आज स्थिति यह है कि भवन की हालत खुद सवाल बन गई है।
आखिर मेंटेनेंस के नाम पर आने वाली राशि कहां खर्च हो रही है?
यदि खर्च हो रही है तो उसका असर जमीन पर क्यों दिखाई नहीं देता?
और यदि खर्च नहीं हो रही तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
जब ग्राम सभा जैसे महत्वपूर्ण आयोजन इसी भवन में हो रहे हैं, तब इसकी बदहाली केवल सफाई का मुद्दा नहीं बल्कि सरकारी व्यवस्थाओं की जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। अब मैनपुर की जनता जवाब चाहती है।





