मैनपुर। नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है। बच्चे स्कूल पहुंच चुके हैं, कक्षाएं लग रही हैं और अभिभावक अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर फीस भी जमा कर रहे हैं। लेकिन इसी बीच DAV मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल, देहारगुड़ा द्वारा विभिन्न शिक्षकीय एवं गैर-शिक्षकीय पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। इसके बाद शिक्षा व्यवस्था और स्कूल प्रबंधन की कार्यशैली को लेकर कई सवाल खड़े होने लगे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पूरे अप्रैल और मई महीने के साथ-साथ जून के शुरुआती दिनों तक स्कूल प्रबंधन के पास पर्याप्त समय था, तब भर्ती प्रक्रिया क्यों नहीं की गई? आखिर ऐसा क्या हुआ कि स्कूल खुलने के बाद शिक्षकों और कर्मचारियों की आवश्यकता महसूस हुई?
क्या बिना शिक्षकों के शुरू हुआ नया सत्र?
यदि विद्यालय में शिक्षकों की कमी पहले से थी तो नए शिक्षा सत्र के पहले ही नियुक्तियां पूरी हो जानी चाहिए थीं। लेकिन अब जब बच्चे पढ़ाई शुरू कर चुके हैं, तब भर्ती प्रक्रिया शुरू करना कई सवालों को जन्म देता है।
क्या स्कूल प्रबंधन को पहले से खाली पदों की जानकारी नहीं थी?
क्या विद्यार्थियों की पढ़ाई से ज्यादा महत्वपूर्ण भर्ती प्रक्रिया का इंतजार था?
क्या शुरुआती दिनों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हुई होगी?
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावों पर सवाल
हर साल स्कूलों द्वारा बेहतर शिक्षा, उत्कृष्ट परिणाम और आधुनिक शिक्षण व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन जब शिक्षक ही समय पर उपलब्ध नहीं होंगे तो इन दावों की हकीकत क्या होगी?
किसी भी शैक्षणिक संस्थान की गुणवत्ता उसके शिक्षकों से तय होती है। यदि सत्र शुरू होने के बाद भी शिक्षकों की भर्ती जारी है तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ सकता है।
अभिभावकों की चिंता भी जायज
अभिभावकों का कहना है कि बच्चों का दाखिला, फीस और अन्य औपचारिकताएं समय पर पूरी कर ली जाती हैं, लेकिन जब शिक्षकों की नियुक्ति की बात आती है तो देरी क्यों होती है?
यदि किसी विषय का शिक्षक समय पर नहीं मिलेगा तो उस विषय की पढ़ाई का नुकसान कौन पूरा करेगा?
क्या स्कूल प्रबंधन इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार है?
आखिर इतनी देर क्यों?
अब क्षेत्र में चर्चा इस बात की है कि क्या यह भर्ती वास्तव में अचानक उत्पन्न हुई आवश्यकता का परिणाम है या फिर स्कूल प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा?
यदि पद पहले से रिक्त थे तो भर्ती प्रक्रिया समय रहते पूरी क्यों नहीं की गई?
यदि पद हाल ही में रिक्त हुए हैं तो इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
जवाब का इंतजार
DAV मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल देहारगुड़ा क्षेत्र के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में गिना जाता है। ऐसे में अभिभावकों और स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि स्कूल प्रबंधन इन सवालों का स्पष्ट जवाब देगा और यह बताएगा कि आखिर शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद भर्ती निकालने की नौबत क्यों आई।
क्योंकि सवाल सिर्फ भर्ती का नहीं है, सवाल उन बच्चों के भविष्य का है जो हर दिन स्कूल पहुंचकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उम्मीद करते हैं।
जब स्कूल खुलने के बाद शिक्षकों की तलाश शुरू होगी, तो फिर शिक्षा की गुणवत्ता कैसे सुधरेगी? यही सवाल आज हर अभिभावक और हर जागरूक नागरिक के मन में है।




क्या बिना शिक्षकों के शुरू हुआ नया सत्र?
