मैनपुर। अति संवेदनशील और नक्सल प्रभावित राजापड़ाव क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा निर्माणाधीन सड़क मेन रोड से गरहाडीह बस्ती तक 1.50 किलोमीटर सड़क अब निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही सवालों के घेरे में आ गई है। विभागीय सूचना बोर्ड के अनुसार इस सड़क निर्माण के लिए 1 करोड़ 44 लाख 80 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि निर्माण कार्य अभी अधूरा है और पहली बारिश में सड़क के कई हिस्सों में पानी भरने लगा है। ऐसे में ग्रामीण आशंका जता रहे हैं कि यदि अभी से जलभराव की स्थिति है, तो बारिश के चरम मौसम में सड़क की वास्तविक स्थिति क्या होगी।
अधूरी सड़क और जलभराव ने बढ़ाई चिंता
सड़क निर्माण अभी पूर्ण नहीं हुआ है। कई स्थानों पर केवल गिट्टी डाली गई है, जबकि कुछ हिस्सों में निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है। वहीं हल्की बारिश और पानी के बहाव के बाद सड़क पर जलभराव की स्थिति देखने को मिल रही है।
जिस सड़क का उद्देश्य वर्षों तक आवागमन को सुगम बनाना है, यदि वही सड़क निर्माण के दौरान ही पानी रोकने लगे तो निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी सर्वेक्षण पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
STF फंड और बढ़ी हुई SOR दरों पर सवाल
क्षेत्र की अति संवेदनशील स्थिति को देखते हुए जिला सदस्य एवं जनप्रतिनिधि संजय नेताम द्वारा इस परियोजना में STF फंड शामिल करने की मांग की गई थी, ताकि क्षेत्र को बेहतर सड़क सुविधा मिल सके। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण परियोजना में SOR (Schedule of Rates) की दरें भी सामान्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक स्वीकृत हुई हैं।
लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि बढ़ी हुई SOR दरों और STF मद से प्राप्त अतिरिक्त राशि का लाभ आम जनता को कम और विभागीय व्यवस्था तथा निर्माण एजेंसी को अधिक मिलता दिखाई दे रहा है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब करोड़ों रुपये की राशि स्वीकृत है तो फिर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और गति दोनों कमजोर क्यों दिखाई दे रही हैं।
जहां आवश्यकता नहीं, वहां पुलिया निर्माण का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना में कुछ स्थानों पर पुलिया और जल निकासी संरचनाओं का निर्माण ऐसी जगह किया गया है जहां उसकी वास्तविक आवश्यकता नहीं थी। इतना ही नहीं, कुछ स्थानों पर पानी के प्राकृतिक बहाव की दिशा को ध्यान में रखे बिना निर्माण किए जाने की बात भी सामने आ रही है।
अब पहली बारिश के साथ सड़क पर जलभराव दिखाई देने से ग्रामीणों के आरोपों को और बल मिल रहा है। लोगों का कहना है कि यदि जल निकासी व्यवस्था सही होती तो सड़क पर पानी जमा नहीं होता।
बारिश सिर पर, लेकिन काम की रफ्तार सुस्त
निर्माण स्थल पर अभी भी कई जगह गिट्टी और निर्माण सामग्री के ढेर दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार पिछले कुछ समय से निर्माण कार्य की गति बेहद धीमी है। मानसून की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद कार्य में तेजी नहीं लाई गई है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण पूरा नहीं हुआ तो बारिश के कारण सड़क को नुकसान पहुंच सकता है और लागत बढ़ने की संभावना भी बन सकती है।
वन सीमा तक सीमित कर दी गई परियोजना?
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि सड़क को गरहाडीह से आगे तक बढ़ाया जा सकता था, लेकिन वन क्षेत्र की सीमा आने के बाद परियोजना को वहीं समाप्त कर दिया गया। उनका कहना है कि यदि संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति (NOC) ली जाती तो अधिक आबादी को सड़क का लाभ मिल सकता था।
अधिकारियों के रवैये पर भी सवाल
जब ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की लागत, गुणवत्ता और तकनीकी पहलुओं को लेकर संबंधित अधिकारियों और इंजीनियरों से सवाल किए तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें जवाब मिला — “मैं इंजीनियर हूं या आप?”
इस कथित जवाब ने ग्रामीणों की नाराजगी और बढ़ा दी है। उनका कहना है कि जनता के पैसे से बनने वाले कार्यों पर सवाल पूछना उनका अधिकार है।
आकर्षण का केंद्र बना यह सड़क
1.5 किलोमीटर की सड़क 1 करोड़ 44 लाख 80 हजार का बजट लगता है की इस सड़क पर चांदी की परत चरने वाली है और चांदी की परत वाले सड़क का ग्रामीणों को बेसबरी से इंतजार है !
विकास की कहानी या सिस्टम की सच्चाई ?
राजापड़ाव से गरहाडीह तक बनने वाली यह सड़क आदिवासी और दूरस्थ बस्ती के लिए महत्वपूर्ण परियोजना मानी जा रही है। लेकिन 1.44 करोड़ रुपये की लागत, STF फंड, बढ़ी हुई SOR दरें, अधूरा निर्माण, पहली बारिश में जलभराव और धीमी कार्य गति ने पूरे प्रकरण को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
अब क्षेत्र के ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि सड़क निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच, गुणवत्ता परीक्षण और वित्तीय ऑडिट कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विकास के नाम पर खर्च की जा रही करोड़ों रुपये की राशि वास्तव में जनता के हित में उपयोग हो रही है या नहीं।




आकर्षण का केंद्र बना यह सड़क 
