राधे पटेल / गरियाबंद गरियाबंद। जिले में चल रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण के दौरान एक सदी पुरानी दुर्लभ तालपत्र पांडुलिपि सामने आई है। कलेक्टर बीएस उइके ने गांव पहुंचकर पांडुलिपि का निरीक्षण किया और इसके संरक्षण व डिजिटलीकरण के निर्देश दिए।
यह पांडुलिपि गरियाबंद विकासखंड के दांतबायकला ग्राम पंचायत अंतर्गत बोकरामुड़ा गांव में बिसुराम सोरी के घर पर सुरक्षित मिली। परिवार के अनुसार, उड़िया भाषा में लिखी यह पांडुलिपि उनके परदादा द्वारा करीब एक सदी पहले सुरक्षित रखी गई थी और तब से पीढ़ियों से संरक्षित है।
करीब 229 पन्नों की इस तालपत्र पांडुलिपि में ज्योतिष शास्त्र से संबंधित गणनाएं, शुभ मुहूर्त निर्धारण और उस समय प्रचलित सामाजिक व धार्मिक परंपराओं का उल्लेख किया गया है। पुराने समय में विवाह, गृह प्रवेश और भूमि पूजन जैसे कार्यों का समय तय करने में इस तरह की पांडुलिपियों का उपयोग किया जाता था।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पांडुलिपि को संरक्षण की दृष्टि से जियो-टैग किया। कलेक्टर बीएस उइके ने इसे जिले की सांस्कृतिक धरोहर बताते हुए कहा कि ऐसी प्राचीन पांडुलिपियों का संरक्षण और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना जरूरी है, ताकि भविष्य में शोध कार्यों में इनका उपयोग किया जा सके।
यह कार्य ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत जिले की 324 ग्राम
पंचायतों और 6 नगरीय निकायों में 70 वर्ष से अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों की पहचान का कार्य जारी है।
कलेक्टर ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियां उपलब्ध हैं, तो वे प्रशासन को इसकी जानकारी दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वेक्षण प्रक्रिया पूरी तरह स्वैच्छिक है और इससे पांडुलिपियों के स्वामित्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इस दौरान डिप्टी कलेक्टर नेहा भेड़िया, जनपद पंचायत सीईओ केएस नागेश सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।



