स्थानीय और पारंपरिक सामग्री से तैयार राखियों की बढ़ी मांग, 21 से 28 अगस्त तक आकांक्षा हाट में विशेष विक्रय स्टॉल
गरियाबंद। रक्षाबंधन का पर्व गरियाबंद जिले की बिहान से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं के लिए इस बार भाई-बहन के स्नेह के साथ स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर भी लेकर आया है। स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं स्थानीय और पारंपरिक सामग्री से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं और इनके विक्रय से अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रही हैं। जिला प्रशासन की ओर से इन उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए विशेष विक्रय स्टॉल भी लगाए जा रहे हैं।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर चंद्राकर के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाएं राखी निर्माण को स्वरोजगार के रूप में आगे बढ़ा रही हैं। मैनपुर विकासखंड में महिलाओं ने 5,340 रुपये की लागत से राखियां तैयार कर अब तक 11,258 रुपये की बिक्री दर्ज की है।
धान, मूंगा, मटर और दालों से तैयार हो रहीं राखियां
गरियाबंद विकासखंड के संजीवनी संकुल संगठन जोबा से संबद्ध गायत्री स्व-सहायता समूह सढ़ौली की चार महिला सदस्य भी अलग-अलग डिजाइन की राखियां तैयार कर रही हैं। खास बात यह है कि इन राखियों में धान-चावल, मूंगा, मटर, झरगा, सेमी और अरहर सहित स्थानीय सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनकी कीमत 5 रुपये से 60 रुपये तक रखी गई है।
वहीं छुरा विकासखंड के ग्राम जामली स्थित जय भवानी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने बांस से राखियां तैयार की हैं। वर्ष 2026 में समूह ने करीब 1 हजार राखियों का स्टॉक तैयार किया है, जिन्हें रक्षाबंधन के दौरान बाजार में बेचा जाएगा।
फिंगेश्वर की महिला ने तैयार की 5 हजार राखियां
फिंगेश्वर विकासखंड के ग्राम पंचायत रोहिना अंतर्गत जय मां घटारानी स्व-सहायता समूह की सदस्य कोयल साहू ने विजय विकास महिला संकुल संगठन कौंदकेरा से जुड़कर इस वर्ष करीब 5 हजार राखियां तैयार की हैं। इनकी कीमत 5 से 40 रुपये तक रखी गई है।
समूह ने करीब 10 हजार रुपये की लागत से राखियां तैयार कीं और अब तक 12 हजार रुपये की बिक्री दर्ज की है। वर्तमान में लगभग 4 हजार राखियां उपलब्ध हैं, जिनके विक्रय से करीब 16 हजार रुपये तक लाभ होने का अनुमान है।
जनपद पंचायतों में लगाए जा रहे राखी विक्रय स्टॉल
बिहान की महिलाओं द्वारा तैयार राखियों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए जिले के विभिन्न जनपद पंचायत क्षेत्रों में केनोपी के माध्यम से राखी विक्रय स्टॉल लगाए जा रहे हैं। इन स्टॉलों पर लोगों को हस्तनिर्मित और स्थानीय सामग्री से तैयार राखियां उपलब्ध होंगी।
जिला प्रशासन द्वारा आकांक्षा हाट में 21 से 28 अगस्त 2026 तक विशेष राखी विक्रय स्टॉल भी लगाया जा रहा है। इससे ग्रामीण महिला समूहों को अपने उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का बेहतर अवसर मिलेगा।
त्योहार बना ग्रामीण महिलाओं की कमाई का जरिया
राखी निर्माण की यह पहल केवल त्योहार से जुड़ी बिक्री तक सीमित नहीं है। इससे ग्रामीण महिलाएं उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग, मूल्य निर्धारण और बाजार से जुड़ाव जैसी गतिविधियों का अनुभव हासिल कर रही हैं। त्योहारों को स्थानीय उत्पादों से जोड़ने से महिलाओं को घर और गांव स्तर पर ही अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है।
जिला पंचायत गरियाबंद द्वारा बिहान के माध्यम से स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को उद्यमिता विकास, कौशल उन्नयन, वित्तीय समावेशन और बाजार उपलब्धता से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि रक्षाबंधन पर बिहान की दीदियों द्वारा तैयार स्थानीय और हस्तनिर्मित राखियों को प्राथमिकता देकर ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में सहभागी बनें।



