पालक विनय कुमार राजपूत ने PMO, जन शिकायत पोर्टल और कलेक्टर से की शिकायत; RTI में मिली जानकारी को बताया भ्रामक, जांच और रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग
गरियाबंद। पांडुका स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा 9 की रिक्त सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। मैनपुर निवासी एवं पालक विनय कुमार राजपूत ने आरोप लगाया है कि कक्षा 9 में उपलब्ध करीब 40 सीटों की जानकारी जिले के पात्र विद्यार्थियों और अभिभावकों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंचाई गई। मामले को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), छत्तीसगढ़ जन शिकायत पोर्टल और गरियाबंद कलेक्टर के समक्ष शिकायत कर प्रवेश प्रक्रिया की जांच और संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए नवोदय विद्यालय में प्रवेश का अवसर महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि रिक्त सीटों की जानकारी समय पर सार्वजनिक नहीं होती है तो कई प्रतिभाशाली विद्यार्थी आवेदन करने के अवसर से ही वंचित हो सकते हैं।
RTI के जवाब के बाद उठे और सवाल
विनय कुमार राजपूत के अनुसार उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जवाहर नवोदय विद्यालय पांडुका से प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित जानकारी मांगी थी। उनका दावा है कि जवाब में बताया गया कि जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए विकासखंड शिक्षा अधिकारी को पत्र जारी किया गया था।
शिकायतकर्ता का कहना है कि कागजों में प्रचार-प्रसार की प्रक्रिया का उल्लेख होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर ऐसी व्यापक सार्वजनिक सूचना दिखाई नहीं दी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों और अभिभावकों तक जानकारी पहुंच सके।
वेबसाइट बंद होने और सीटों की संख्या को लेकर भी सवाल
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि जिस अवधि में ऑनलाइन आवेदन किए जा रहे थे, उस दौरान सरकारी वेबसाइट बंद होने की जानकारी सामने आई। साथ ही उनके अनुसार उपलब्ध सीटों की संख्या भी कम बताई गई।
राजपूत का दावा है कि बाद में केंद्रीय स्तर से करीब 40 अतिरिक्त सीटें बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई, लेकिन इन सीटों की जानकारी स्थानीय स्तर पर विद्यालय प्रबंधन या जिला शिक्षा विभाग की ओर से पर्याप्त रूप से सार्वजनिक नहीं की गई।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। सीटों की वास्तविक संख्या, सीट वृद्धि की प्रक्रिया और संबंधित सूचना किस स्तर पर जारी की गई थी, इसका स्पष्ट रिकॉर्ड सामने आना अभी बाकी है।
11वीं की एक सीट के लिए 80 आवेदन तो 9वीं की सीटों पर सवाल क्यों?
शिकायतकर्ता ने प्रवेश प्रक्रिया में सूचना के प्रचार-प्रसार को लेकर एक और सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जब कक्षा 11 में एक सीट रिक्त हुई तो उसके लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई और करीब 80 आवेदन प्राप्त हुए।
राजपूत का सवाल है कि यदि एक सीट के लिए प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हो सकते हैं, तो कक्षा 9 की रिक्त सीटों की जानकारी भी इसी तरह व्यापक रूप से सार्वजनिक की जाती तो ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थी भी आवेदन कर सकते थे।
NVS की व्यवस्था में चयन परीक्षा से होता है प्रवेश
नवोदय विद्यालय समिति की आधिकारिक जानकारी के अनुसार कक्षा IX में प्रवेश जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा के माध्यम से किया जाता है।
ऐसे में पांडुका में जिन 40 सीटों को लेकर शिकायत की गई है, उनके संबंध में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि ये सीटें किस प्रक्रिया के तहत उपलब्ध हुईं, कितने विद्यार्थियों ने आवेदन किया, परीक्षा या चयन की प्रक्रिया क्या रही और अंतिम चयन सूची किस आधार पर तैयार की गई।
DEO बोले- व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया
मामले में सदस्य जिला शिक्षा अधिकारी राजेश चंद्राकर ने कहा कि विभाग की ओर से व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया है।
प्राचार्य बोलीं- सरकारी वेबसाइट की प्रक्रिया हमारे नियंत्रण में नहीं
जवाहर नवोदय विद्यालय पांडुका की प्राचार्य महिमा सिन्हा ने कहा कि विद्यालय में किसी भी कार्य को छिपाकर या दबाकर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकारी वेबसाइट की प्रक्रिया विद्यालय प्राचार्य के नियंत्रण में नहीं रहती। विद्यार्थियों को प्रवेश सरकारी वेबसाइट पर दर्ज जानकारी और प्राप्त निर्देशों के आधार पर ही दिया जाता है।
अब जांच में साफ होगी पूरी तस्वीर
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि कक्षा 9 की रिक्त सीटों की संख्या, केंद्रीय स्तर से सीट बढ़ाने संबंधी आदेश, प्रचार-प्रसार के लिए जारी पत्र, प्राप्त आवेदनों की संख्या, चयन सूची और प्रवेश से जुड़े सभी रिकॉर्ड की जांच की जाए।
मामले में अब मुख्य सवाल यही है कि 40 सीटों की जानकारी कितने विद्यार्थियों तक पहुंची, प्रचार-प्रसार वास्तव में किस स्तर तक हुआ और प्रवेश प्रक्रिया में सभी पात्र विद्यार्थियों को समान अवसर मिला या नहीं। शिकायत पर संबंधित उच्च अधिकारियों की जांच और रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

