परेशान हैं 41 बच्चे • 4 साल से अधूरे भवन पर सरकार व विभाग ने साधी चुप्पी, गोठान में बैठकर पढ़ने को मजबूर
मैनपुर। शिक्षा के अधिकार और चमचमाते स्कूलों के सरकारी दावों के बीच गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड का दूरस्थ आदिवासी गांव मोतीपानी बदहाल व्यवस्था की पोल खोल रहा है। यहां पिछले 4 वर्षों से प्राथमिक शाला का भवन नहीं है। गांव के 41 मासूम बच्चे गाय के कोठे (गोठाननुमा भवन) में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। बरसात शुरू होते ही छत से पानी टपकने और कीचड़ भरने से हालात नारकीय हो जाते हैं। शासन-प्रशासन और जिला शिक्षा विभाग से गुहार लगाकर थक चुके ग्रामीणों ने अब खुद ही मोर्चा संभाल लिया है। पूरे गांव ने आपसी चंदा इकट्ठा किया, एक ग्रामीण का कच्चा मकान लिया और गांव के हर घर से एक-एक व्यक्ति श्रमदान कर बच्चों के लिए स्कूल तैयार करने में जुट गया है।
2002 का भवन डिस्मेंटल, 4 साल से अधूरा पड़ा है नया निर्माण
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2002 में बने प्राथमिक शाला भवन को करीब 4 साल पहले जर्जर घोषित कर डिस्मेंटल कर दिया गया था। उसी समय नए स्कूल भवन की स्वीकृति भी मिल गई, लेकिन आज तक निर्माण पूरा नहीं हो सका। ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर भाग गया और बच्चे अस्थायी ठिकानों पर भटकने लगे। बारिश के दिनों में बैठने की जगह न मिलने से अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेजते, जिससे 41 बच्चों का शैक्षणिक भविष्य अधर में लटका हुआ है।
कलेक्टर का आश्वासन भी निकला हवा-हवाई
ग्रामीणों ने ग्राम गोना में आयोजित सुशासन शिविर में तत्कालीन कलेक्टर के सामने यह पीड़ा रखी थी। तब जिला कलेक्टर ने भरोसा दिलाया था कि 15 जून तक हर हाल में भवन का निर्माण पूरा कर नए शिक्षा सत्र में बच्चों को पक्के भवन में शिफ्ट किया जाएगा। नया सत्र शुरू होकर महीने बीत गए, लेकिन न तो भवन बना और न ही बच्चों को पक्की छत मिली।
क्या कहते हैं जिम्मेदार: जिला शिक्षा अधिकारी
“यह क्षेत्र पूर्व में नक्सल प्रभावित रहा है, जिसके कारण यहां निर्माण और सुधार कार्य प्रभावित हुए हैं। स्कूलों के पास भी भवन की मरम्मत और सुधार के लिए शासन स्तर से कुछ राशि आती है (हालांकि वर्तमान में मुझे सटीक अनुदान राशि ध्यान में नहीं है)। जहां तक पुराने भवन को डिस्मेंटल करने और नए स्कूल भवन का निर्माण कार्य रोके जाने का विषय है, इस संबंध में मैं कलेक्टर महोदय से चर्चा करूंगा। लापरवाही बरतने वाली संबंधित निर्माण एजेंसी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
— राजेश चंद्राकर, जिला शिक्षा अधिकारी, गरियाबंद

