गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के सुदूर और सौर विद्युतीकृत गांवों के लिए राहत भरी खबर है। वर्षों पुराने और क्षमता खो चुके सोलर पावर प्लांटों के उन्नयन की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए क्रेडा (CREDA) ने पहले चरण में 40 सोलर संयंत्रों के सुधार कार्य को स्वीकृति दे दी है। इसके तहत पुराने सोलर पैनल, बैटरी बैंक, इनवर्टर तथा कंट्रोल रूम की मरम्मत और आवश्यक उपकरणों का प्रतिस्थापन किया जाएगा।
Press Release Gariyaband उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के कई गांवों में लगभग 15 से 20 वर्ष पहले स्थापित सोलर पावर प्लांट अब अपनी उपयोगी क्षमता खो चुके हैं। सोलर पैनलों की बिजली उत्पादन क्षमता काफी कम हो गई है, जबकि बैटरी बैंक भी पुराने होने से ग्रामीणों को रात के समय केवल कुछ घंटों के लिए ही बिजली मिल पा रही थी। इससे अधिकांश गांव अंधेरे में रहने को मजबूर थे।
ग्रामीणों की मांग और आंदोलन के बाद बढ़ी पहल
राजापड़ाव क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से बिजली, सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल भवन और स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग कर रहे थे। कुछ माह पहले राष्ट्रीय राजमार्ग-130 पर चक्काजाम कर लोगों ने अपनी नाराजगी जताई थी। इसके बाद ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को खून से पत्र लिखकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया था। इसी क्रम में शासन स्तर पर मामले को गंभीरता से लेते हुए क्रेडा को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
पहले चरण में 40 संयंत्र होंगे दुरुस्त
क्रेडा के फील्ड अधिकारियों द्वारा सर्वेक्षण के बाद पहले चरण में 14 ग्राम पंचायतों के आश्रित गांवों में स्थापित 40 सोलर संयंत्रों के सुधार का प्रस्ताव तैयार किया गया, जिसे स्वीकृति मिल चुकी है। जिला स्तर पर कार्य प्रारंभ करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। शेष गांवों के लिए भी शासन से अतिरिक्त बजट की मांग भेजी गई है।
ग्रामीणों को मिलेगा सीधा लाभ
पुराने सोलर पैनल, बैटरियां और अन्य उपकरण बदलने के बाद संयंत्रों की बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। इससे ग्रामीणों को रात में अधिक समय तक रोशनी उपलब्ध होगी। विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए पर्याप्त प्रकाश मिलेगा और दूरस्थ गांवों में जीवन स्तर सुधारने में भी मदद मिलेगी।






