आमामोरा के बाद लेडीबहार में हाथियों की दस्तक • रात के अंधेरे में 25 से 30 हाथियों के दल ने बोला धावा
राधे पटेल | गरियाबंद मैनपुर | ओड़िशा सीमा से लगे ओढ़ ,आमामोरा क्षेत्र में उत्पात मचाने के बाद अब 25 से 30 हाथियों का एक बड़ा दल लेडीबहार पहुंच गया है। बीते दिनों रात के समय हाथियों के इस झुंड ने लेडीबहार गांव में दस्तक दी और किसानों की करीब 5 से 6 एकड़ कृषि भूमि में लगी खड़ी फसलों पर धावा बोल दिया। हाथियों ने खेतों में घुसकर फसलों को पूरी तरह रौंद कर बर्बाद कर दिया है। घटना के बाद से यह दल अब भी आसपास के जंगलों में ही विचरण कर रहा है, जिसके चलते ग्रामीणों और किसानों में भारी दहशत का माहौल है।
हाथियों पर नज़र बनाए हुए है वन विभाग की ट्रैकिंग टीम हाथियों के दल के लेडीबहार और आसपास के जंगलों में विचरण करने की सूचना मिलने के बाद वन विभाग अलर्ट मोड पर है। वन विभाग की ट्रैकिंग टीम लगातार इलाके में सक्रिय है और हाथियों के मूवमेंट पर पल-पल की नज़र बनाए हुए है। टीम द्वारा ग्रामीणों को जंगल की तरफ न जाने और सतर्क रहने की हिदायत दी जा रही है।
पिछले साल भी हुआ था भारी नुकसान क्षेत्र में हाथियों का यह आतंक कोई नया नहीं है। पिछले वर्ष भी शुरुआती दौर में ही हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया था। तब वन विभाग द्वारा करीब 200 किसानों के फसल नुकसान का प्रकरण दर्ज किया गया था। इस साल भी हाथियों के दस्तक देने से किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। दिन-रात खेतों की रखवाली करने के बावजूद गजराजों के इतने बड़े झुंड के सामने किसान खुद को बेबस महसूस कर रहे हैं।
मुआवजे की राशि से किसानों में भारी आक्रोश फसलों के भारी नुकसान से त्रस्त किसानों में वन विभाग द्वारा दिए जाने वाले मुआवजे को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। दरअसल, वन विभाग द्वारा फसल क्षति के मुआवजे के रूप में प्रति एकड़ मात्र 9,000 रुपये की राशि दी जाती है। किसानों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में 9,000 रुपये की यह नाममात्र की राशि हमारी रात-दिन की मेहनत पर करारा तमाचा है।
लागत से भी कम है मुआवजा राशि किसानों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि आज के समय में अच्छी फसल के उत्पादन के लिए खेत की जुताई, महंगे बीज, उन्नत खाद और कीटनाशक दवाओं के छिड़काव में ही 9 हजार रुपये प्रति एकड़ से कहीं अधिक का खर्च आ जाता है। ऊपर से दिन-रात की हाड़-तोड़ मेहनत अलग। ऐसे में फसल पूरी तरह बर्बाद होने पर यह मुआवजा नाकाफी है।
किसानों ने शासन-प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि वर्तमान महंगाई और खेती की बढ़ती लागत को देखते हुए फसल क्षतिपूर्ति की मुआवजा राशि में तत्काल वृद्धि की जाए, ताकि संकट की इस घड़ी में किसानों को उनके नुकसान की उचित भरपाई मिल सके।

