नई दिल्ली: नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और देश भर में जारी भारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में चल रहे उग्र छात्र आंदोलन और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बाद उन्होंने शनिवार को अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया।
इस्तीफे की चिट्ठी में क्या लिखा?
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने त्यागपत्र में स्पष्ट किया है कि छात्रों का भविष्य किसी भी विवाद और राजनीति से ऊपर है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा, “पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से मेरा मन अत्यंत दुखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है।”
प्रधान ने जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि वह नहीं चाहते कि देश के युवाओं और छात्रों का भविष्य कानूनी पचड़ों या राजनीतिक टकराव में उलझे। उन्होंने लिखा, “जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, उसका राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ न उठाएं। देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं और करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है।”
‘मैंने अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा’
अपने पत्र में प्रधान ने 3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में हुई गड़बड़ियों का भी विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले ही दिन से इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतें आते ही सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए:
मामले की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी।
परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया।
अगले साल से नीट को पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में आयोजित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
प्रधान ने जोर देते हुए कहा, “मैंने पहले ही दिन से जिम्मेदारी ली है और परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। हमारा संकल्प था कि किसी भी मेधावी छात्र की संभावनाएं परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे और किसी के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।”
जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन बनी वजह
नीट-यूजी परीक्षा में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद से ही देशभर के छात्र आक्रोशित थे। दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी (CJP) के बैनर तले छात्र पिछले कई दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे थे और शिक्षा प्रणाली में सुधार के साथ-साथ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए थे। शुरुआत में सरकार की ओर से इस्तीफे की संभावनाओं को खारिज किया गया था, लेकिन छात्रों के भारी आक्रोश और गतिरोध को देखते हुए अंततः धर्मेंद्र प्रधान को यह बड़ा कदम उठाना पड़ा।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया है और कहा है कि वह सार्वजनिक जीवन में आगे भी भारत माता और देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए निष्ठा के साथ काम करते रहेंगे।





