गरियाबंद। वन विभाग की लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां जर्जर वन कर्मचारी आवास भवन में रखी गई कीटनाशक दवाओं के कारण एक गाय की मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र के मवेशी पालकों में भारी नाराजगी और चिंता का माहौल है।
मामला मैनपुर मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर ग्राम झरियाबाहरा स्थित वन
जांच नाका के समीप बने पुराने एवं जर्जर वन कर्मचारी आवास भवन का है, जो सामान्य वन मंडल के अंतर्गत आता है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार लंबे समय से इस परित्यक्त भवन में बड़ी मात्रा में कीटनाशक दवाएं रखी गई हैं। भवन की स्थिति इतनी खराब है कि वहां किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था , दरवाजा भी मौजूद नहीं है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव निवासी अरुण कुमार साहू की गाय उक्त भवन में पहुंच गई थी, जहां रखी जहरीली दवाओं के संपर्क/सेवन में आने से उसकी मौत हो गई। पशुपालकों का कहना है कि यदि समय रहते वन विभाग द्वारा दवाओं का सुरक्षित भंडारण किया गया होता तो यह घटना नहीं होती।
घटना के बाद ग्रामीणों और पशुपालकों ने वन विभाग को इसकी सूचना दी, लेकिन आरोप है कि विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्यवाही या प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जर्जर भवन में खुले तौर पर रखी गई कीटनाशक दवाएं न केवल मवेशियों बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के लिए , एवं आसपास खेलने वाले बच्चो के लिए भी खतरा बनी हुई हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि भवन में रखी दवाओं को तत्काल सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए तथा मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
कीटनाशक और जहरीले रसायनों के संपर्क में आने से पशुओं की मृत्यु की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, इसलिए ऐसे रसायनों का सुरक्षित भंडारण अत्यंत आवश्यक माना जाता है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग जल्द कार्रवाई नहीं करता तो वे प्रशासन के समक्ष शिकायत दर्ज कर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल है और लोग वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
यहाँ पर अन्य वन कर्मचारी निवास भवन भी पूरी तरह से जर्जर है !
अब देखना यह है की मावेशी पालक के छति पर उन्हें वन विभाग के द्वारा कोई मुआवजा की राशि दी जाती है ?





