ग्राम पंचायत खोखमा में वित्तीय अनियमितता का आरोप, निर्वाचित जनप्रतिनिधि के नाम पर बिल काटे जाने से मचा हड़कंप; जिला पंचायत सीईओ ने कहा- जांच के बाद होगी नियमानुसार कार्रवाई
राधे पटेल / गरियाबंदमैनपुर। विकासखंड मैनपुर की ग्राम पंचायत खोखमा में पंचायत के कामकाज और वित्तीय प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पंचायत सचिव द्वारा अपनी ही पंचायत के निर्वाचित उपसरपंच के नाम पर लाखों रुपए का बिल काटे जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि पंचायत सचिव थानसिंह नायक ने उपसरपंच को प्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से पंचायत के नाम पर बिल जारी किया और भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
मामला सामने आने के बाद पंचायत स्तर पर हड़कंप की स्थिति है। ग्रामीण इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पंचायत में होने वाले विकास कार्यों और सरकारी राशि के खर्च में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। ऐसे में यदि निर्वाचित जनप्रतिनिधि को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से पंचायत की राशि से संबंधित बिल जारी किया गया है, तो इसकी जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।
निर्वाचित उपसरपंच के नाम पर बिल, उठे सवाल
ग्राम पंचायत खोखमा में पंचायत सचिव द्वारा निर्वाचित उपसरपंच के नाम पर बिल काटे जाने की बात सामने आई है। बिल किस मद में, किस कार्य के लिए और किन परिस्थितियों में जारी किया गया, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के जिम्मेदार पद पर बैठे सचिव द्वारा यदि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को सीधे लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से वित्तीय प्रक्रिया अपनाई गई है, तो यह पंचायत के वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर विषय है।
हालांकि, पूरे मामले में वास्तविक वित्तीय अनियमितता कितनी हुई है और भुगतान हुआ है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सचिव ने स्वीकार की गलती
मामले में पंचायत सचिव थानसिंह नायक ने अपनी गलती स्वीकार किए जाने की बात कही है। सचिव के इस कथित स्वीकारोक्ति के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है। अब सवाल यह है कि आखिर किस आधार पर उपसरपंच के नाम पर बिल काटा गया और पंचायत की वित्तीय प्रक्रिया में इसकी अनुमति किस स्तर से मिली।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि गलती स्वीकार की गई है तो पूरे प्रकरण की दस्तावेजी जांच होनी चाहिए। बिल, वाउचर, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड, पंचायत प्रस्ताव और संबंधित कार्यों की वास्तविक स्थिति की जांच से ही सच्चाई सामने आ सकती है।
लाखों के बिल की जांच से खुलेगा पूरा राज
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल बिल की राशि और उसके भुगतान से जुड़ा हुआ है। पंचायत स्तर पर किसी भी भुगतान के लिए संबंधित दस्तावेज, कार्य की स्वीकृति, पंचायत प्रस्ताव और अन्य वित्तीय प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है।
ऐसे में जांच के दौरान यह देखा जाना जरूरी होगा कि:
उपसरपंच के नाम पर बिल किस मद में काटा गया?
बिल की कुल राशि कितनी है?
बिल किस कार्य या सामग्री के लिए जारी किया गया?
क्या संबंधित कार्य वास्तव में मौके पर हुआ है?
पंचायत के रिकॉर्ड में इस संबंध में प्रस्ताव दर्ज है या नहीं?
बिल का भुगतान हुआ है या भुगतान की प्रक्रिया चल रही थी?
भुगतान होने की स्थिति में राशि किसके खाते में गई?
पंचायत की वित्तीय प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
जिला पंचायत सीईओ ने कहा- मामला गंभीर, जांच के बाद होगी कार्रवाई
मामले को लेकर जिला पंचायत गरियाबंद के सीईओ प्रखर चंद्राकर ने इसे गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह से बिल काटकर किसी को लाभ पहुंचाने का काम किया गया है तो मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जिला पंचायत सीईओ के बयान के बाद अब ग्रामीणों की नजर जांच की प्रक्रिया पर है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पंचायत के मूल दस्तावेजों और मौके की स्थिति का परीक्षण कर वास्तविकता सामने लाई जानी चाहिए।
पंचायत में पारदर्शिता पर उठे सवाल
ग्राम पंचायतों में शासन की विभिन्न योजनाओं के तहत विकास कार्यों के लिए बड़ी मात्रा में राशि आती है। सड़क, नाली, भवन, पेयजल, स्वच्छता और अन्य जनहित से जुड़े कार्यों में पंचायत स्तर से राशि खर्च की जाती है। ऐसे में पंचायत की वित्तीय प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण है।
खोखमा पंचायत में सामने आए इस मामले ने पंचायत के वित्तीय कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी राशि जनता के विकास के लिए होती है और इसके खर्च में किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका होने पर जिम्मेदार अधिकारियों को गंभीरता से जांच करनी चाहिए।
जांच रिपोर्ट के बाद तय होगी जिम्मेदारी
फिलहाल पूरे मामले में वास्तविक तथ्य जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे। यह भी जांच का विषय है कि बिल जारी करने की प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही और इससे पंचायत को आर्थिक नुकसान हुआ या नहीं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जिला पंचायत से मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कराने की मांग की है। साथ ही संबंधित दस्तावेजों की जांच कर यदि वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
अब देखना होगा कि जांच में लाखों रुपए के इस बिल के पीछे की पूरी कहानी क्या सामने आती है और पंचायत की वित्तीय प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ी के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है।

