वैज्ञानिक साक्ष्यों ने USTR का पक्ष किया मजबूत, अतिक्रमण मुक्त वनभूमि से वन्यजीव संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) को वन अतिक्रमण के खिलाफ चल रही कार्रवाई में बड़ी कानूनी सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के गोहरामाल क्षेत्र में वन अतिक्रमण के खिलाफ की गई कार्रवाई को चुनौती देने वाली दो रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया है। दोनों मामलों की सुनवाई 31 अगस्त 2026 को हुई। उपलब्ध न्यायिक विवरण के अनुसार याचिकाकर्ताओं की अनुपस्थिति के कारण दोनों याचिकाएं अभियोजन के अभाव में खारिज की गईं।
वैज्ञानिक साक्ष्यों ने मजबूत किया वन विभाग का पक्ष
वन अतिक्रमण से जुड़े मामलों में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की ओर से वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया गया। अतिक्रमण की स्थिति और उसकी समय-सीमा निर्धारित करने के लिए ISRO की उपग्रह इमेजरी के साथ ड्रोन मैपिंग, GPS आधारित सर्वेक्षण और स्थलीय सत्यापन जैसे माध्यमों का उपयोग किया गया।
इन साक्ष्यों के माध्यम से वन विभाग ने यह स्थापित करने का प्रयास किया कि संबंधित क्षेत्रों में किया गया कब्जा वन अधिकारों की वैधानिक पात्रता से जुड़ी निर्धारित कट-ऑफ तिथि के बाद हुआ था। विभाग की कार्रवाई से पहले संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया गया था।
6 प्रमुख क्षेत्रों में 276 लोगों को हटाकर 595.76 हेक्टेयर वनभूमि वापस
उपलब्ध जानकारी के अनुसार USTR द्वारा छह प्रमुख क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए 276 व्यक्तियों को बेदखल कर करीब 595.76 हेक्टेयर अतिक्रमित वनभूमि पुनः प्राप्त की गई। वहीं कुछ क्षेत्रों में स्थानीय परिवारों द्वारा अतिक्रमित जमीन स्वेच्छा से खाली किए जाने के बाद भी बड़ी मात्रा में वनभूमि वापस प्राप्त हुई।
इसके अलावा वर्ष 2025 में इंदागांव बफर रेंज में की गई कार्रवाई के दौरान 60.7 हेक्टेयर अतिक्रमित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। इस कार्रवाई में भी उपग्रह इमेजरी सहित तकनीकी साक्ष्यों का इस्तेमाल किया गया था।
अतिक्रमण हटने से वन्यजीवों के आवास को राहत
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व गरियाबंद जिले का महत्वपूर्ण वन्यजीव क्षेत्र है और यहां वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास मौजूद हैं। रिजर्व में वनभूमि पर अतिक्रमण और जंगल की कटाई से वन आवरण और वन्यजीवों के प्राकृतिक रहवास पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
ऐसे में अतिक्रमण मुक्त कराई गई भूमि को पुनः वन क्षेत्र के रूप में सुरक्षित करना वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे वन्यजीवों के आवास को सुरक्षित रखने और जंगल के प्राकृतिक स्वरूप को बहाल करने के प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है।
कानूनी कार्रवाई के साथ संरक्षण अभियान भी जारी

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले कुछ वर्षों से वन अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई लगातार चर्चा में रही है। हाईकोर्ट में हुई कार्यवाही और वैज्ञानिक साक्ष्यों के इस्तेमाल से यह स्पष्ट होता है कि वनभूमि की पहचान और अतिक्रमण हटाने के लिए अब तकनीकी संसाधनों का भी व्यापक उपयोग किया जा रहा है।
हालांकि, वन अधिकारों और स्थानीय ग्रामीणों के दावों से जुड़े मामलों में प्रत्येक प्रकरण की कानूनी और तथ्यात्मक स्थिति अलग होती है। इसलिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में पात्र वन अधिकारों और लागू कानूनों का पालन भी महत्वपूर्ण है।
हाईकोर्ट की ताजा कार्रवाई के बाद उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन अतिक्रमण के खिलाफ चल रहे अभियान को कानूनी मजबूती मिली है। अब अतिक्रमण मुक्त कराई गई वनभूमि की सुरक्षा और उसे वन्यजीवों के सुरक्षित आवास के रूप में विकसित करना वन विभाग के सामने अगली महत्वपूर्ण चुनौती होगी।



