देवभोग। किडनी प्रभावित गांव सुपेबेड़ा एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर विवादों के केंद्र में आ गया है। इस बार मामला एक किडनी मरीज को मिलने वाले ब्लड बढ़ाने वाले इंजेक्शन से जुड़ा है। मरीज के परिजन द्वारा इंजेक्शन की जानकारी मांगने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ पर अभद्र व्यवहार और धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है और सतनामी समाज ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की घोषणा की है।
जानकारी के अनुसार सतनामी समाज सुपेबेड़ा के अध्यक्ष टंकधर आंडलिय की पत्नी प्रेमबाई आंडलिय किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। उपचार के दौरान उन्हें नियमित रूप से EPO 10,000 IU इंजेक्शन की आवश्यकता पड़ती है, जो शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है। शासन द्वारा सुपेबेड़ा के किडनी मरीजों को यह सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान है, लेकिन आरोप है कि मरीजों तक समय पर इंजेक्शन नहीं पहुंच रहा है।
बताया जा रहा है कि रविवार सुबह टंकधर आंडलिय अपनी पत्नी के लिए इंजेक्शन की उपलब्धता की जानकारी लेने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने बीएमओ डॉ. प्रकाश साहू से पूछा कि किडनी मरीजों के लिए आने वाले इंजेक्शन मरीजों तक क्यों नहीं पहुंच रहे हैं। आरोप है कि इस सवाल के बाद उन्हें कथित रूप से धमकाया गया और थप्पड़ मारने जैसी बात कही गई। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि किडनी मरीजों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं, जिससे मरीज परिवार और समाज के लोगों में गहरी नाराजगी व्याप्त है।
कलेक्टर समेत कई अधिकारियों को सौंपा गया ज्ञापन
मामले को गंभीर मानते हुए टंकधर आंडलिय ने इसकी लिखित शिकायत कलेक्टर, एसडीएम, पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार और थाना प्रभारी को सौंपकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी मामले की चर्चा शुरू हो गई है।
स्वास्थ्य विभाग के दावों पर उठे सवाल
सुपेबेड़ा पिछले कई वर्षों से किडनी बीमारी की त्रासदी झेल रहा है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर विशेष चिकित्सा सुविधाएं, उपचार और मरीजों की देखभाल के दावे किए जाते रहे हैं। लेकिन मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि यदि वे अपने इलाज, दवाओं और इंजेक्शन की जानकारी मांगते हैं और उन्हें कथित रूप से अपमानित या धमकाया जाता है, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मरीजों को अपने इलाज और स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में जानकारी मांगने का पूरा अधिकार है। यदि अस्पतालों में सवाल पूछने पर ही लोगों को प्रताड़ित किया जाएगा, तो आम नागरिक अपनी समस्याएं किसके सामने रखेंगे।
4 जून तक कार्रवाई नहीं तो होगा आंदोलन
सतनामी समाज द्वारा प्रशासन को दिए गए ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि 4 जून 2026 तक मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो समाज के लोग धरना-प्रदर्शन और जनआंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे। समाज के पदाधिकारियों ने कहा है कि यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं, बल्कि किडनी पीड़ित मरीजों के सम्मान और अधिकारों का प्रश्न है।
प्रशासन की भूमिका पर टिकी निगाहें
सुपेबेड़ा के किडनी मरीज वर्षों से जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों से संवेदनशील व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। अब यह मामला प्रशासन के सामने है और क्षेत्र की जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिकायत की निष्पक्ष जांच कर पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाया जाएगा या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा।





