करीब 200 की आबादी वाले गांव में पक्की सड़क तो दूर, बारिश में कच्ची पगडंडी भी बन जाती है कीचड़; ग्रामीणों ने वीबी-जी राम जी योजना से मिट्टी सड़क बनाने की मांग की
मैनपुर। गरियाबंद जिले के जंगल धवलपुर ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले लादाबाहरा गांव के ग्रामीण आजादी के बाद से सड़क सुविधा का इंतजार कर रहे हैं। गांव से धवलपुर तक करीब 1.5 किलोमीटर सड़क नहीं होने के कारण करीब 200 की आबादी आज भी कच्ची पगडंडियों के सहारे आवागमन करने को मजबूर है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को होती है, जिन्हें रोजाना करीब 4 किलोमीटर पैदल चलकर धवलपुर स्कूल जाना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि लादाबाहरा के लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें धवलपुर से जुड़ी हैं। राशन, बाजार, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधा सहित अन्य जरूरी कामों के लिए उन्हें धवलपुर पहुंचना पड़ता है। लेकिन गांव को जोड़ने वाला रास्ता सुविधाजनक नहीं होने के कारण ग्रामीणों को हर मौसम में परेशानी उठानी पड़ती है।
बारिश में रास्ता बन जाता है कीचड़
ग्रामीणों के अनुसार गर्मी के दिनों में पगडंडी से किसी तरह आवागमन हो जाता है, लेकिन बारिश शुरू होते ही यही रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है। फिसलन भरे रास्ते पर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों को इसी रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उनके कपड़े गंदे होने के साथ ही गिरने और चोट लगने का खतरा भी बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में समस्या केवल बच्चों की पढ़ाई तक सीमित नहीं रहती, बल्कि बुजुर्गों, महिलाओं और बीमार लोगों को भी गांव से बाहर ले जाने में काफी दिक्कत होती है।
सड़क नहीं होने से आपात स्थिति में बढ़ जाती है परेशानी
लादाबाहरा में सड़क सुविधा नहीं होने का असर आपातकालीन परिस्थितियों में भी दिखाई देता है। किसी ग्रामीण के अचानक बीमार पड़ने या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की स्थिति में वाहन को गांव तक पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि 108 संजीवनी एक्सप्रेस जैसी आपातकालीन सेवा के लिए भी सड़क की स्थिति बड़ी बाधा बनती है।
ग्रामीणों के मुताबिक सड़क का निर्माण केवल आवागमन की सुविधा नहीं, बल्कि गांव के लोगों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल है।
पक्की सड़क नहीं तो मिट्टी सड़क ही बना दें
ग्रामीणों ने अब संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि यदि तत्काल पक्की सड़क का निर्माण संभव नहीं है तो कम से कम वीबी-जी राम जी योजना के तहत गांव से धवलपुर तक करीब 1.5 किलोमीटर लंबी मिट्टी सड़क का निर्माण कराया जाए।
केंद्र सरकार की नई वीबी-जी राम जी व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से लागू हुई है और इसके तहत ग्रामीण सड़क तथा अन्य टिकाऊ ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है।
ग्रामीणों का कहना है कि मिट्टी सड़क बनने से कम से कम बारिश के दिनों में आवागमन काफी हद तक आसान हो सकता है। रास्ते का समतलीकरण और आवश्यक जगहों पर मिट्टी डालकर सड़क तैयार की जाए तो स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को कीचड़ भरी पगडंडी से राहत मिल सकती है।
सवाल—डेढ़ किलोमीटर सड़क के लिए आखिर कब तक इंतजार?
लादाबाहरा के ग्रामीणों का कहना है कि गांव की आबादी बहुत बड़ी नहीं है और धवलपुर से दूरी भी करीब 1.5 किलोमीटर है। इसके बावजूद वर्षों से सड़क नहीं बन पाना ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय है।
ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि जब डेढ़ किलोमीटर सड़क उनके बच्चों की पढ़ाई, मरीजों की जिंदगी और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी है, तो आखिर इस सड़क के निर्माण के लिए कब पहल होगी?
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण कर सड़क की वास्तविक स्थिति देखें और ग्राम पंचायत के माध्यम से आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर जल्द से जल्द सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू करें। उनका कहना है कि फिलहाल उन्हें पक्की सड़क का इंतजार रहेगा, लेकिन कम से कम चलने योग्य मिट्टी सड़क बन जाए तो गांव के लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।





