ज्ञापन में बताया गया है कि मैनपुर तहसील में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के ऑनलाइन आवेदन “दस्तावेज अपूर्ण”, “दस्तावेजों में कमी” अथवा अन्य तकनीकी आपत्तियां लगाकर बार-बार वापस किए जा रहे हैं। जबकि पूर्व वर्षों में इसी प्रकार के दस्तावेजों के आधार पर विद्यार्थियों के जाति, निवास और आय प्रमाण-पत्र जारी किए जा चुके हैं।
बार-बार तहसील और चॉइस सेंटर के चक्कर
संजय नेताम ने कहा कि आवेदन निरस्त होने से विद्यार्थियों और उनके पालकों को बार-बार चॉइस सेंटर एवं तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों से आने वाले परिवारों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ रही है।
उन्होंने बताया कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है और स्कूलों, महाविद्यालयों में प्रवेश, छात्रवृत्ति, प्रतियोगी परीक्षाओं तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं के लिए समय पर प्रमाण-पत्र उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। यदि समय पर दस्तावेज नहीं बने तो हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई और भविष्य प्रभावित हो सकता है। विभिन्न सरकारी प्रक्रियाओं में जाति, निवास और आय प्रमाण-पत्र महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं।
अनावश्यक आपत्तियों की जांच की मांग
ज्ञापन के माध्यम से जिला पंचायत सदस्य ने मांग की कि मैनपुर तहसील में प्रमाण-पत्र आवेदनों पर लगाई जा रही अनावश्यक आपत्तियों की जांच कर पात्र विद्यार्थियों के आवेदनों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
साथ ही यदि दस्तावेजों से संबंधित कोई नए दिशा-निर्देश लागू किए गए हैं तो उनकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि आम नागरिकों और विद्यार्थियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
‘विद्यार्थियों के भविष्य से समझौता स्वीकार नहीं’
संजय नेताम ने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल समाधान सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि किसी भी छात्र की पढ़ाई केवल प्रमाण-पत्रों के अभाव में प्रभावित न हो।
उन्होंने जिला प्रशासन से आग्रह किया कि विद्यार्थियों और अभिभावकों के हितों को प्राथमिकता देते हुए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई की जाए, जिससे समय पर जाति, निवास एवं आय प्रमाण-पत्र जारी हो सकें और छात्रों को प्रवेश, छात्रवृत्ति तथा अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के मिल सके।







