राधे पटेल / गरियाबंद भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में खुद को IAS अधिकारी बताकर कथित तौर पर लोगों से ठगी करने का मामला सामने आने के बाद तृप्ति सिंह राजपूत सुर्खियों में है। पुलिस जांच में उसके खिलाफ एक के बाद एक कई शिकायतें और FIR सामने आई हैं। आरोप है कि तृप्ति खुद को ट्रेनी IAS अधिकारी और मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग (MPT) की एडिशनल डायरेक्टर बताकर लोगों को सरकारी नौकरी, पर्यटन विभाग के होटल-रिसॉर्ट लीज और अन्य सरकारी काम दिलाने का भरोसा देती थी। इसी पहचान और कथित प्रभाव का इस्तेमाल कर उसने अलग-अलग लोगों से लाखों रुपये लिए।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उसके खिलाफ भोपाल और अशोकनगर क्षेत्र में कई मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से पैसे लेने से लेकर होटल और रिसॉर्ट लीज दिलाने के नाम पर बड़ी रकम लेने के आरोप शामिल हैं।
सोशल मीडिया वीडियो से खुलने लगी फर्जी अफसर की पोल
मामला उस समय ज्यादा चर्चा में आया जब तृप्ति से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। रिपोर्टों के अनुसार, वह खुद को IAS अधिकारी और प्रोबेशनर बताती हुई नजर आई। विधानसभा परिसर से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद उसके कथित सरकारी रुतबे और पहचान पर सवाल उठने लगे।
एक वायरल वीडियो में वह अपनी दो सहेलियों के साथ नजर आई थी। इन वीडियो की जांच के दौरान पुलिस को तृप्ति की गतिविधियों और उसकी कथित फर्जी पहचान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली।
सरकारी नौकरी के नाम पर 9.80 लाख रुपये लेने का आरोप
तृप्ति सिंह के खिलाफ सामने आए शुरुआती मामलों में अशोकनगर के चंदेरी क्षेत्र में चार युवकों से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर कथित रूप से 9.80 लाख रुपये लेने का आरोप है।
शिकायत के अनुसार, युवाओं को मंत्रालय और सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया था। तृप्ति ने खुद को प्रभावशाली सरकारी अधिकारी के रूप में पेश किया और इसी पहचान के आधार पर युवाओं का विश्वास हासिल किया। पुलिस जांच आगे बढ़ने पर मामला केवल नौकरी के नाम पर ठगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कथित फर्जी सरकारी पहचान और दस्तावेजों के इस्तेमाल के पहलू भी जांच के दायरे में आए।
होटल-रिसॉर्ट लीज के नाम पर 39.17 लाख की कथित ठगी
भोपाल के बागसेवनिया थाने में दर्ज एक मामले में तृप्ति सिंह, उसके भाई सुधांशु सिंह और अन्य लोगों के खिलाफ 39.17 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया।
शिकायत के मुताबिक, एक व्यक्ति को मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग की होटल और रिसॉर्ट संपत्तियां लीज पर दिलाने का भरोसा दिया गया। आरोप है कि होटल-रिसॉर्ट की लीज के नाम पर 35.30 लाख रुपये और नौकरी दिलाने के नाम पर अलग से 3.87 लाख रुपये लिए गए। कुल रकम 39.17 लाख रुपये बताई गई है।
पुलिस के अनुसार, संबंधित व्यक्ति को यह विश्वास दिलाया गया था कि तृप्ति पर्यटन विभाग में प्रभावशाली पद पर है और वह सरकारी संपत्तियों की लीज प्रक्रिया में मदद कर सकती है।
चौथी FIR में करीब 50 लाख की ठगी का आरोप
मामला यहीं नहीं रुका। सितंबर 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, बागसेवनिया पुलिस ने होटल लीज के नाम पर करीब 49 से 50 लाख रुपये की कथित ठगी को लेकर एक और FIR दर्ज की। इसे तृप्ति के खिलाफ चौथी FIR बताया गया है।
इस मामले में तृप्ति के साथ उसके भाई सुधांशु सिंह और साथी प्रखर को भी आरोपी बनाया गया है। शिकायत में आरोप है कि होटल और रिसॉर्ट लीज दिलाने के नाम पर बड़ी रकम ली गई, लेकिन वादा पूरा नहीं हुआ। पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाते हुए तृप्ति से पूछताछ के लिए प्रोडक्शन रिमांड की कार्रवाई की।
दो युवतियों से भी नौकरी के नाम पर पैसे लेने का आरोप
जांच के दौरान सामने आई एक अन्य जानकारी ने मामले को और गंभीर बना दिया। रिपोर्ट के अनुसार, विधानसभा से जुड़े वायरल वीडियो में तृप्ति के साथ दिखाई देने वाली दो युवतियों ने भी आरोप लगाया कि उनसे सरकारी नौकरी और IAS बनाने का झांसा देकर तीन-तीन लाख रुपये, यानी कुल 6 लाख रुपये, लिए गए।
यह आरोप सामने आने के बाद पुलिस जांच में संभावित पीड़ितों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई गई।
घर से मिले फर्जी दस्तावेज और पहचान से जुड़े सामान
पुलिस जांच के दौरान तृप्ति के भोपाल स्थित घर की तलाशी की खबरें भी सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक, तलाशी के दौरान कथित तौर पर फर्जी सरकारी दस्तावेज, पहचान-पत्र, लेटरहेड और अन्य सामग्री बरामद होने की बात कही गई है।
पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किन लोगों को प्रभावित करने या ठगी करने के लिए किया गया था और इस पूरे मामले में उसके साथ और कौन-कौन लोग जुड़े हो सकते हैं।
पति को भी IAS होने का दिया था झांसा?
मामले की जांच में तृप्ति की कथित फर्जी पहचान से जुड़ी पुरानी कहानी भी सामने आई है। सितंबर 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, उसने कथित तौर पर खुद को IAS अधिकारी बताकर एक बिल्डर के बेटे से शादी की थी। बाद में उसके पति को उसकी शैक्षणिक और IAS संबंधी पहचान पर संदेह हुआ और जानकारी जुटाने के बाद कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आधिकारिक रिकॉर्ड की जानकारी लेने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि तृप्ति IAS अधिकारी नहीं थी। इसके बाद भी वह कथित रूप से अलग-अलग लोगों के सामने सरकारी अधिकारी होने का दावा करती रही।
जांच में सामने आ सकते हैं और भी मामले
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि तृप्ति ने कितने लोगों को अपनी कथित फर्जी पहचान के जरिए प्रभावित किया और कुल कितनी रकम की ठगी हुई। जांच एजेंसियां उसके संपर्कों, बैंक लेनदेन, दस्तावेजों और उसके साथ जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तृप्ति के खिलाफ सामने आए मामलों में नौकरी, होटल-रिसॉर्ट लीज और सरकारी पद का प्रभाव दिखाकर पैसे लेने जैसे आरोप शामिल हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, संभावित पीड़ितों की संख्या और कथित ठगी की कुल रकम के संबंध में और जानकारी सामने आने की संभावना है।
फर्जी IAS का मामला बना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए सवाल
तृप्ति सिंह का मामला केवल ठगी तक सीमित नहीं माना जा रहा है। यदि जांच में फर्जी सरकारी पहचान और दस्तावेजों के इस्तेमाल के आरोप साबित होते हैं, तो यह सवाल भी उठता है कि एक व्यक्ति लंबे समय तक खुद को IAS अधिकारी बताकर सरकारी तंत्र से जुड़े स्थानों तक कैसे पहुंचता रहा।
सोशल मीडिया पर सरकारी पद और रुतबे की छवि बनाकर लोगों का भरोसा हासिल करना आज के डिजिटल दौर में ठगी का एक नया तरीका बनता जा रहा है। तृप्ति सिंह प्रकरण में भी सोशल मीडिया वीडियो ही कथित तौर पर उसकी पहचान और गतिविधियों की जांच का अहम आधार बना।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और अदालत में आरोपों का अंतिम निर्धारण होना बाकी है।

