गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत ओडिशा सीमा से लगे ग्राम पंचायत बिरीघाट में विकास कार्यों की जमीनी हकीकत सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही है। यहां पिछले लगभग चार वर्षों से पंचायत भवन का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य की आधे से अधिक राशि का आहरण पहले ही कर लिया गया, लेकिन भवन आज तक पूर्ण नहीं हो पाया है। इससे पंचायत संचालन सहित ग्रामीणों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि ओडिशा सीमा से लगे कई गांवों में निर्माण कार्य अधूरे छोड़ दिए गए हैं। कागजों में राशि खर्च दिखा दी जाती है, जबकि जमीनी स्तर पर कार्य अधूरा ही रहता है। बिरीघाट पंचायत भी ऐसे ही मामलों का एक उदाहरण बनकर सामने आई है।
आंगनबाड़ी भवन में चल रही पंचायत, जर्जर पंचायत भवन में पढ़ रहे बच्चे
पंचायत भवन अधूरा होने के कारण वर्तमान में ग्राम पंचायत का संचालन आंगनबाड़ी भवन से किया जा रहा है। वहीं आंगनबाड़ी केंद्र पुराने और जर्जर पंचायत भवन में संचालित हो रहा है। टूटती दीवारों और खस्ताहाल भवन में छोटे-छोटे बच्चों को बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस गंभीर समस्या से कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि बच्चों की सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे को भी नजरअंदाज किया जा रहा है।
शौचालय निर्माण भी चार वर्षों से अधूरा
पंचायत भवन के पीछे बनाए जा रहे शौचालय की स्थिति भी बदहाल है। ग्रामीणों के अनुसार शौचालय निर्माण की राशि का आहरण कर लिया गया, लेकिन मौके पर केवल आधी छत डालकर निर्माण कार्य रोक दिया गया। पिछले चार वर्षों से यह कार्य भी अधूरा पड़ा हुआ है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब निर्माण कार्यों की राशि खर्च हो चुकी है, तो अधूरे कार्य आखिर कब पूरे होंगे? साथ ही दोषी अधिकारियों और जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी? ग्रामीणों का यह भी कहना है कि चार वर्षों तक इन निर्माण कार्यों की जांच नहीं होना विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हुए जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करता है और अधूरे निर्माण कार्यों को कब तक पूरा कराया जाता है।
सीईओ बोले – निरीक्षण कर दिए थे सख्त निर्देश
जनपद पंचायत मैनपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जितेश गजभिए ने मामले में कहा,
“मैं स्वयं बिरीघाट पंचायत गया था और अधूरे पंचायत भवन का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान सचिव और सरपंच को सख्त निर्देश दिए गए थे। मैं अभी भी इस मामले को दिखवाता हूं और निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू कराने के निर्देश देता हूं।”







