मोहला-मानपुर-चौकी। जिले में शिक्षकों की कमी की समस्या के बीच अब स्कूलों में मूलभूत व्यवस्थाओं का संकट भी सामने आने लगा है। मानपुर विकासखंड के जबकसा शासकीय प्राथमिक शाला में सोमवार को ग्रामीणों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा, जब उन्होंने स्कूल परिसर में तालाबंदी कर दी। हैरानी की बात यह रही कि यह विरोध शिक्षकों की कमी को लेकर नहीं, बल्कि स्कूल में सफाईकर्मी (स्वीपर) नहीं होने के कारण किया गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में पदस्थ सफाईकर्मी सोमनाथ पुरामे को 27 सितंबर 2023 से अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय मानपुर में संलग्न कर दिया गया था। इसके बाद से स्कूल में सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी अप्रत्यक्ष रूप से स्कूली बच्चों पर आ गई थी। बच्चों को स्वयं स्कूल परिसर की साफ-सफाई करनी पड़ रही थी, जिससे पालकों और ग्रामीणों में लंबे समय से नाराजगी बनी हुई थी।
बच्चों से करवाई जा रही थी सफाई, कई बार की गई शिकायत
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन वर्षों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार उपेक्षा के बाद आखिरकार ग्रामीणों ने बच्चों और पालकों के साथ स्कूल के मुख्य द्वार पर तालाबंदी कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
स्कूल के बाहर बच्चे और अभिभावक धरने पर बैठ गए तथा प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। ग्रामीणों का कहना था कि स्कूल में सफाईकर्मी की नियुक्ति होने के बावजूद बच्चों से सफाई करवाना अनुचित है और इससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
तालाबंदी से मचा हड़कंप, तत्काल हुआ रिलीफ
मामले की जानकारी जैसे ही प्रशासन और शिक्षा विभाग तक पहुंची, विभाग में हड़कंप मच गया। विरोध बढ़ता देख अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय की ओर से त्वरित कार्रवाई करते हुए सफाईकर्मी सोमनाथ पुरामे को जबकसा प्राथमिक शाला के लिए रिलीफ कर दिया गया।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी ए.आर. कौर ने बताया कि स्कूल में पदस्थ सफाईकर्मी को कार्यालय से मुक्त कर दिया गया है और उसे पुनः जबकसा प्राथमिक शाला में कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि संबंधित कर्मचारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन बंद होने के कारण बातचीत नहीं हो सकी। बाद में जानकारी मिली कि स्वास्थ्य खराब होने के कारण वह मोहला गया हुआ है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी को विद्यालय के लिए भारमुक्त कर दिया गया है और मंगलवार से विद्यालय में अपनी सेवाएं देगा।
दो घंटे तक धरने पर बैठे रहे ग्रामीण, जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचे
ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग दो घंटे तक स्कूल के बाहर तालाबंदी और धरना प्रदर्शन चलता रहा, लेकिन स्थिति का जायजा लेने कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। प्रदर्शन के दौरान अधिकारी कार्यालयों में बैठकर फोन पर जानकारी लेते रहे, जबकि ग्रामीण समाधान की प्रतीक्षा करते रहे।
इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते उनकी शिकायतों पर ध्यान दिया गया होता तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होती और विरोध की नौबत भी नहीं आती।
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
ग्रामीणों और पालकों का कहना है कि स्कूलों में केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि सफाईकर्मी, रसोइया और अन्य आवश्यक कर्मचारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि इन पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को वर्षों तक अन्य कार्यालयों में संलग्न रखा जाएगा, तो इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा और विद्यालय की व्यवस्था पर पड़ेगा।
फिलहाल प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के बाद मामला शांत होता नजर आ रहा है, लेकिन यह घटना शिक्षा विभाग के लिए एक चेतावनी भी है कि स्कूलों से जुड़े छोटे दिखने वाले मुद्दे समय पर नहीं सुलझाए गए तो वे बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकते हैं।





