भारतीय संगीत जगत में कुछ आवाज़ें ऐसी होती हैं जो समय के साथ और भी अमर हो जाती हैं। ऐसी ही एक आवाज़ हैं अलका याज्ञनिक, जिन्होंने अपनी मधुर गायकी से करोड़ों लोगों के दिलों में खास जगह बनाई। 90 के दशक से लेकर आज तक उनके गाए गीत लोगों की जुबान पर हैं। वर्ष 2026 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण सम्मान देकर उनके चार दशक से अधिक लंबे
संगीत योगदान को सम्मानित किया।
बचपन से था संगीत का जुनून
20 मार्च 1966 को कोलकाता में जन्मी अलका याज्ञनिक का संगीत से रिश्ता बचपन से ही जुड़ गया था। उनकी मां शुभा याज्ञनिक शास्त्रीय संगीत की गायिका थीं। महज छह वर्ष की उम्र में अलका ने आकाशवाणी कोलकाता के लिए गाना शुरू कर दिया था। उनकी प्रतिभा को देखकर परिवार ने उन्हें संगीत की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
मुंबई में संघर्ष के दिन
सफलता का रास्ता कभी आसान नहीं होता। अलका याज्ञनिक भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए मुंबई पहुंचीं। उस समय फिल्म इंडस्ट्री में पहले से कई बड़े नाम मौजूद थे। नए कलाकार के लिए पहचान बनाना बेहद मुश्किल था।
कई ऑडिशन, असफलताएं और इंतजार के बाद उन्हें छोटे-छोटे अवसर मिलने लगे। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनकी मेहनत और लगन ने धीरे-धीरे संगीतकारों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
‘एक दो तीन’ ने बदल दी जिंदगी
साल 1988 में फिल्म ‘तेजाब’ का गीत “एक दो तीन” रिलीज हुआ। यह गीत सुपरहिट साबित हुआ और अलका याज्ञनिक रातों-रात देश की सबसे लोकप्रिय गायिकाओं में शामिल हो गईं। इस गाने ने उन्हें बॉलीवुड की नई पहचान दी और सफलता के दरवाजे खोल दिए।
90 के दशक की सबसे पसंदीदा आवाज़
1990 और 2000 के शुरुआती वर्षों में अलका याज्ञनिक बॉलीवुड की सबसे व्यस्त और लोकप्रिय पार्श्व गायिका बन गईं। उनकी आवाज़ कई सुपरहिट फिल्मों की पहचान बन गई।
उन्होंने अनेक यादगार गीत गाए, जिनमें शामिल हैं:
- एक दो तीन
- कुछ कुछ होता है
- ताल से ताल मिला
- दिल ने ये कहा है दिल से
- ओ रे छोरी
- हम तुम
- अगर तुम साथ हो
उनकी आवाज़ में रोमांस, भावनाएं और मधुरता का ऐसा संगम था जिसने हर पीढ़ी को प्रभावित किया।
पुरस्कारों की लंबी सूची
अलका याज्ञनिक ने अपने करियर में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कीं।
उनके प्रमुख सम्मान:
- 2 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
- 7 फिल्मफेयर पुरस्कार
- अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान
- भारतीय संगीत जगत की सबसे सफल पार्श्व गायिकाओं में स्थान
यूट्यूब पर भी बनाया रिकॉर्ड
डिजिटल युग में भी अलका याज्ञनिक की लोकप्रियता कम नहीं हुई। उनके गीत आज भी करोड़ों बार सुने जाते हैं। उनकी आवाज़ नई पीढ़ी के श्रोताओं तक लगातार पहुंच रही है। यही कारण है कि उन्हें भारतीय संगीत इतिहास की सबसे प्रभावशाली गायिकाओं में गिना जाता है।
स्वास्थ्य चुनौतियों से भी लड़ीं
साल 2024 में अलका याज्ञनिक ने खुलासा किया कि वह एक दुर्लभ सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस (श्रवण समस्या) से जूझ रही हैं। यह किसी भी गायक के लिए बेहद कठिन परिस्थिति होती है। इसके बावजूद उन्होंने साहस नहीं छोड़ा और लगातार स्वास्थ्य लाभ की दिशा में प्रयास जारी रखे।
पद्म भूषण से सम्मानित
वर्ष 2026 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। यह सम्मान भारतीय संगीत में उनके अतुलनीय योगदान की राष्ट्रीय मान्यता है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
अलका याज्ञनिक की कहानी हमें सिखाती है कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं बल्कि लगातार मेहनत, धैर्य और समर्पण से मिलती है। एक साधारण परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च सम्मानों में से एक पद्म भूषण प्राप्त करना उनकी अद्भुत यात्रा का प्रमाण है।
आज भी जब उनके गीत बजते हैं, तो लाखों लोग भावनाओं से भर उठते हैं। उनकी आवाज़ आने वाली पीढ़ियों तक भारतीय संगीत की पहचान बनी रहेगी।




90 के दशक की सबसे पसंदीदा आवाज़
