राधे पटेल / गरियाबंद दो महीने में ही जवाब देने लगी फेंसिंग, पहले भी सवालों में रहा वन विभाग का कामकाज
गरियाबंद। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा जंगलों की सुरक्षा और प्राकृतिक पुनर्स्थापन के नाम पर किए जा रहे कार्य एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। गरियाबंद वनमंडल अंतर्गत C/III बोड़ापाला (I. W. C.) सामान्य क्षेत्र में लगाए गए वायर फेंसिंग निर्माण की हालत महज दो महीने में ही बिगड़ने लगी है। कई जगहों पर पोल टेढ़े हो चुके हैं, जबकि कुछ स्थानों पर खंभों को केवल पत्थरों के सहारे खड़ा कर खानापूर्ति कर दी गई है। आरोप है कि सीमेंट का उपयोग बेहद कम मात्रा में किया गया, जिससे निर्माण की गुणवत्ता शुरुआत से ही कमजोर नजर आ रही है।
स्थल पर लगे विभागीय बोर्ड के अनुसार वर्ष 2024-25 में “सहायक प्राकृतिक पुनर्स्थापन कार्य” के तहत यह काम कराया गया है। लेकिन मौके की तस्वीरें और ग्रामीणों के आरोप विभागीय दावों की पोल खोलते दिखाई दे रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जंगल सुरक्षा के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर काम की गुणवत्ता बेहद खराब है। कई स्थानों पर खंभों की नींव मजबूत नहीं बनाई गई और केवल दो-तीन पत्थरों के बीच पोल खड़ा कर ऊपर से हल्का सीमेंट डाल दिया गया। ऐसे में बारिश और हवा के दौरान फेंसिंग टिक पाना मुश्किल माना जा रहा है।
पहले भी विवादों में रहा विभाग
यह पहला मामला नहीं है जब गरियाबंद वन विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आई हो। इससे पहले भी कई घटनाओं ने विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
घायल हिरण की मौत ने उठाए थे सवाल
हाल ही में तौरेगा जांच नाका क्षेत्र में कुत्तों के हमले में घायल नर हिरण की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। मामले में वन्यजीव सुरक्षा और त्वरित रेस्क्यू व्यवस्था पर सवाल उठे थे। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से वन्यजीवों की जान जोखिम में पड़ रही है। पूरी न्यूज़ रिपोर्ट पढ़े !
जंगलों में आग, अधिकारी मुख्यालय से गायब
उदंती अभयारण्य और गरियाबंद वनमंडल के जंगलों में आग लगने की घटनाओं के दौरान भी विभाग की कार्यप्रणाली चर्चा में रही। उस समय आरोप लगे थे कि जिम्मेदार अधिकारी मुख्यालय में मौजूद नहीं थे, जबकि जंगल धू-धू कर जल रहे थे। इससे वन सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े हुए थे। पूरी न्यूज़ रिपोर्ट पढ़े !
महिला समूहों में नाराजगी
ओडिशा सीमा से लगे आमोरा क्षेत्र में वन अमले की सख्ती को लेकर महिला समूहों ने भी नाराजगी जताई थी। ग्रामीणों ने कार्रवाई की धमकी और लेनदेन के भय जैसी शिकायतें सामने रखी थीं। इससे विभाग और ग्रामीणों के बीच अविश्वास की स्थिति बनने लगी है।न्यूज़ रिपोर्ट पढ़े !
सवालों के घेरे में निगरानी और गुणवत्ता
अब फेंसिंग निर्माण में सामने आई लापरवाही ने विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से ज्यादा कागजी प्रक्रिया पर ध्यान दिया गया। यदि शुरुआती महीनों में ही पोल टूटने लगें तो भविष्य में पूरी फेंसिंग व्यवस्था बेकार साबित हो सकती है।
स्थानीय लोगों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच, तकनीकी परीक्षण और निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल सुरक्षा जैसे संवेदनशील कार्य में लापरवाही सीधे वन्यजीवों और ग्रामीणों दोनों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।
अब देखना होगा कि विभाग इन आरोपों को गंभीरता से लेकर जांच करता है या यह मामला भी बाकी शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

