राधे पटेल / गरियाबंद
गरियाबंद। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में बाघ के शिकार की बड़ी साजिश का वन
विभाग ने पर्दाफाश किया है। वन अमले की सतर्कता और लगातार चलाए जा रहे एंटी पोचिंग अभियान के चलते ओडिशा के 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के कब्जे से हिरण का सींग, जहर की शीशी, जहरीली मछलियां और केकड़े बरामद किए गए हैं। मामले में अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है। बाघ जैसे संरक्षित वन्यजीव के शिकार की साजिश में शामिल आरोपियों पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत 7 साल तक की सजा का प्रावधान है।
वन विभाग को गोपनीय सूचना मिली थी कि ओडिशा के नुआपाड़ा जिले के कुछ लोग उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बाघ के शिकार की योजना बना रहे हैं। सूचना मिलते ही टाइगर रिजर्व की एंटी पोचिंग टीम सक्रिय हो गई। बताया जा रहा है कि 5 दिन पहले ही शिकारियों की गतिविधियों को देखते हुए टाइगर रिजर्व की पहाड़ियों और बीहड़ों में तीन अस्थायी चौकी एवं कैंप स्थापित किए गए थे।
बाघ की खाल का दिया गया था “कॉन्ट्रैक्ट”
कार्रवाई के दौरान 9 मई 2026 को ओडिशा निवासी रमन हेरना को हिरण के सींग के साथ गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि उसने बाघ की खाल हासिल करने के लिए कुसुमखूंटा और कटफाड़ गांव के लोगों को “सुपारी” दी थी। आरोपी ने कबूल किया कि बाघ को जहर और तीर-कमान से मारने की योजना बनाई गई थी।
वन विभाग की टीम आरोपी को लेकर ओडिशा के कुसुमखूंटा गांव पहुंची, जहां मुख्य संदिग्ध जालंधर बागरती की पहचान की गई। हालांकि पूछताछ में उसने कई जानकारियां छिपाने की कोशिश की। वन विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए उससे विस्तृत पूछताछ की।
नाले में जहर डालकर किया जा रहा था शिकार
इसी दौरान 10 मई को एंटी पोचिंग टीम ने कटफाड़ गांव के 6 आरोपियों को रानीबरझोला नाला क्षेत्र में पकड़ लिया। आरोपियों पर आरोप है कि वे वन क्षेत्र में अवैध रूप से घुसकर नाले के पानी में जहर डाल रहे थे, ताकि मछलियां, केकड़े और अन्य वन्यजीव मर जाएं और शिकार आसानी से किया जा सके।
वन विभाग ने आरोपियों के पास से जहर की बोतलें, मृत मछलियां और केकड़े जब्त किए। मामले की जांच के लिए गरियाबंद पुलिस की फॉरेंसिक टीम की मदद ली गई और जब्त जहर को परीक्षण के लिए रायपुर लैब भेजा जा रहा है।
हाई अलर्ट पर टाइगर रिजर्व
वन विभाग के अनुसार उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में हाल के महीनों में बाघों की सक्रिय मौजूदगी दर्ज की गई है। यही वजह है कि शिकारियों की गतिविधियों को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। विभाग ने पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर सीमा क्षेत्रों में कैंप लगा दिए हैं। साथ ही ड्रोन और थर्मल निगरानी उपकरणों के जरिए लगातार गश्त की जा रही है। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में हाल के वर्षों में बाघों की आवाजाही बढ़ने की पुष्टि भी हुई है।
वन्यजीवों पर बढ़ता खतरा
देशभर में बाघों की मौत और शिकार की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जहर, बिजली करंट और अवैध शिकार जैसे तरीके वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं।
उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में हुई यह कार्रवाई वन विभाग की बड़ी सफलता मानी जा रही है। लेकिन सवाल यह भी है कि यदि समय रहते सूचना नहीं मिलती, तो शिकारियों की यह साजिश किसी बड़े वन्यजीव अपराध में बदल सकती थी।


