विशेष रिपोर्ट | राधे पटेल / गरियाबंद गरियाबंद | छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के Udanti Sita Nadi Tiger Reserve से लगे ओडिशा सीमा क्षेत्र में एक बार फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ओडिशा सीमा से सटे ग्राम आमामोरा के समीप हुई हालिया घटना ने स्थानीय ग्रामीणों, खासकर महिला स्व-सहायता समूहों में चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि एक समय यह पूरा क्षेत्र लाल आतंक से बुरी तरह प्रभावित रहा, लेकिन अब जब क्षेत्र नक्सल मुक्त होने की ओर बढ़ रहा है, तो वन विभाग की कथित सख्ती को लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं—क्या यही नक्सल मुक्त क्षेत्रों की नई परेशानी है, जहां पहले लाल आतंक था और अब वन अमले का कथित आतंक सामने आ रहा है।
ट्रैक्टर रोकने से शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, एक महुआ से लदा ट्रैक्टर निर्धारित नियमों के कारण शाम 6
बजे जांच नाके पर रुक गया था। जैसा कि Supreme Court of India के निर्देशानुसार टाइगर रिजर्व क्षेत्र में शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक आवागमन प्रतिबंधित रहता है, इसलिए वाहन पूरी रात जांच नाके पर ही खड़ा रहा।
बताया जा रहा है कि सुबह गेट खुलने के बाद जैसे ही ट्रैक्टर अपने गंतव्य की ओर बढ़ा, ग्राम आमामोरा के समीप वन विभाग के कर्मचारियों ने उसे रोक लिया। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, वन विभाग के रेंजर Dinesh Choudhri और उनकी टीम ने महुआ को Odisha से अवैध रूप से लाया गया बताते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी।
12–13 वर्षों से चल रहा है महिला समूहों का व्यवसाय
स्थानीय ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि महिला समूह (बिहान समूह), जो एक पंजीकृत महिला स्व-सहायता समूह है, पिछले 12–13 वर्षों से दूरस्थ पहाड़ी इलाकों में वनोपज की खरीदी-बिक्री कर रहा है। इसी कार्य के माध्यम से महिलाओं ने रोजगार के साधन जुटाए हैं और अपने परिवारों का पालन-पोषण किया है।
महिला समूह की सदस्यों का कहना है कि यह घटना उनके लिए नई नहीं है। उनका आरोप है कि इससे पहले भी कई बार इस प्रकार की घटनाएं हो चुकी हैं, जहां वाहनों को रोक-रोककर पैसों की मांग की जाती है।
गाली-गलौज और पैसों की मांग के आरोप
महिला समूह की महिलाओं ने आरोप लगाया कि वन विभाग के कुछ कर्मचारियों द्वारा वाहन चालकों के साथ गाली-गलौज की गई और कार्रवाई का डर दिखाकर पैसों की मांग किए जाने की आशंका जताई गई।
शासन से मिला 6 लाख का ऋण, अब भुगतान की चिंता
महिला समूह की सदस्यों ने बताया कि उन्हें बिहान योजना के अंतर्गत शासन द्वारा लगभग 6 लाख रुपये का ऋण प्रदान किया गया है। इसी राशि से उन्होंने वनोपज का व्यापार शुरू किया और अपने परिवारों के लिए आय का स्रोत तैयार किया।
महिलाओं का कहना है कि यदि इसी तरह उन्हें रोका-टोका जाएगा और व्यापार में बाधा डाली जाएगी, तो वे ऋण की राशि कैसे चुका पाएंगी और उनका व्यापार आगे कैसे बढ़ पाएगा। उनका यह भी कहना है कि यदि शासन की ही योजनाओं से रोजगार शुरू करने वाले लोगों को सरकारी तंत्र द्वारा परेशान किया जाएगा, तो यह योजनाओं के उद्देश्य पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
निष्पक्ष जांच की मांग
घटना के बाद ग्राम आमामोरा और आसपास के ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
(नोट: यह रिपोर्ट स्थानीय ग्रामीणों और महिला समूह की सदस्यों द्वारा लगाए गए आरोपों और बयानों पर आधारित है। संबंधित वन विभाग या अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना जायेगा , ताकि समाचार का संतुलन बना रहे।)





