गरियाबंद। ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल बाजार से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में गरियाबंद विकासखंड के कौंदकेरा और कोचबाय क्लस्टर में डब्ल्यूडीएल (ई-कॉमर्स) प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य महिला स्व-सहायता समूहों को आधुनिक डिजिटल व्यापार प्रणाली से परिचित कराना तथा उनके उत्पादों को व्यापक बाजार तक पहुंचाने के लिए आवश्यक तकनीकी ज्ञान उपलब्ध कराना था।
यह प्रशिक्षण एएफसी इंडिया द्वारा छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (सीएसआईडीसी) के सहयोग से संचालित रैम्प परियोजना के अंतर्गत आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कुल 83 महिलाओं ने भाग लेकर ई-कॉमर्स, ऑनलाइन मार्केटिंग, डिजिटल भुगतान और ब्रांडिंग संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
डिजिटल बाजार से जुड़ने की मिली जानकारी

प्रशिक्षण के तहत 11 जून को कौंदकेरा क्लस्टर में आयोजित कार्यक्रम में 43 महिलाओं ने भाग लिया, जबकि 13 जून को कोचबाय क्लस्टर में आयोजित प्रशिक्षण में 40 महिलाओं की सहभागिता रही।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रतिभागियों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उत्पादों की ऑनलाइन लिस्टिंग, ग्राहक प्रबंधन, बिक्री बढ़ाने की रणनीतियां तथा डिजिटल भुगतान प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके अलावा सोशल मीडिया के माध्यम से उत्पादों के प्रचार-प्रसार, प्रभावी ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग के महत्व पर भी विशेष रूप से चर्चा की गई।
विशेषज्ञों ने महिलाओं को बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से वे अपने उत्पादों को केवल स्थानीय बाजार तक सीमित न रखकर प्रदेश, देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर के ग्राहकों तक भी पहुंचा सकती हैं। इससे ग्रामीण उत्पादों को नई पहचान मिलने के साथ-साथ आय बढ़ाने के अवसर भी विकसित होंगे।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिलाओं को आधुनिक व्यापारिक तकनीकों और बदलते बाजार के अनुरूप कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर छोटे स्तर के व्यवसाय भी बड़े बाजार तक पहुंच सकते हैं और प्रतिस्पर्धा में अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं।
महिलाओं ने प्रशिक्षण के दौरान ऑनलाइन बिक्री प्रक्रिया, ग्राहक सेवा और डिजिटल लेन-देन की बारीकियों को समझा तथा भविष्य में इन तकनीकों का उपयोग कर अपने उत्पादों के विपणन की इच्छा व्यक्त की।
सरकारी योजनाओं की भी दी गई जानकारी
कार्यक्रम में बिहान की ओर से उपस्थित पीआरपी एवं एरिया कोऑर्डिनेटर ने महिला स्व-सहायता समूहों को विभिन्न सरकारी योजनाओं, स्वरोजगार के अवसरों तथा बाजार से जुड़ने के प्रभावी माध्यमों की जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं को डिजिटल तकनीकों को अपनाकर आत्मनिर्भर बनने और स्थानीय उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म ग्रामीण उद्यमिता को नई दिशा दे रहे हैं। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ उन्हें आधुनिक व्यापारिक दुनिया से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं।
ग्रामीण उद्यमिता को मिलेगा नया विस्तार
डब्ल्यूडीएल (ई-कॉमर्स) प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं को डिजिटल व्यापार की बारीकियों से परिचित कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और तकनीकी कौशल महिलाओं को अपने उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग करने, नए ग्राहकों तक पहुंचने और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाने में मदद करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए आर्थिक प्रगति के नए द्वार खोल सकता है। ऐसे प्रयास स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।





