राधे पटेल / गरियाबंद मैनपुर। गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत इंदागांव में बरसात के मौसम ने गांव की सड़क व्यवस्था की बदहाली को उजागर कर दिया है। मैनपुर मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित इंदागांव में कई मार्ग अब भी कच्चे हैं। बारिश के बाद इन रास्तों पर जगह-जगह कीचड़, गड्ढे और जलभराव की स्थिति बन गई है, जिससे स्कूली बच्चों सहित ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जाने को मजबूर बच्चे
गांव के स्कूली विद्यार्थियों को रोज इसी बदहाल रास्ते से होकर विद्यालय जाना पड़ रहा है। बारिश के बाद सड़क पर पानी भरने और मिट्टी गीली होने से रास्ता बेहद फिसलन भरा हो जाता है। ऐसे में बच्चों को संभल-संभलकर पैदल चलना पड़ता है।
कई जगह सड़क पर बने गड्ढों में पानी जमा होने से यह पता लगाना भी मुश्किल हो जाता है कि रास्ता कितना गहरा है। इससे बच्चों के फिसलकर गिरने और चोटिल होने का खतरा बना रहता है।
बारिश में ग्रामीणों की भी बढ़ जाती है परेशानी
सड़क की खराब स्थिति का असर केवल विद्यार्थियों पर ही नहीं, बल्कि गांव के सभी ग्रामीणों पर पड़ रहा है। रोजमर्रा के काम के लिए आने-जाने वाले लोगों को भी कीचड़ और पानी से होकर गुजरना पड़ता है। दोपहिया वाहनों के लिए भी यह रास्ता मुश्किल भरा हो जाता है और कई बार वाहन कीचड़ में फंसने की स्थिति बन जाती है।
बरसात के दिनों में ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए बाहर निकलने में भी अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है।
कच्ची सड़क पर खर्च हो रहा समय, प्रभावित हो रही पढ़ाई
ग्रामीणों का कहना है कि खराब रास्ते का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। बारिश अधिक होने पर रास्ते की स्थिति और बिगड़ जाती है। ऐसे में बच्चों को स्कूल पहुंचने में अधिक समय लगता है और अभिभावकों को भी उनकी सुरक्षा की चिंता बनी रहती है।
गरियाबंद के ग्रामीण अंचलों में बारिश के दौरान सड़क और आवागमन की समस्या पहले भी सामने आती रही है। हाल में मैनपुर क्षेत्र में स्कूली बच्चों के असुरक्षित रास्तों से स्कूल पहुंचने की खबरें भी सामने आई हैं।
ग्रामीणों की मांग—सड़क को जल्द बनाया जाए
ग्रामीणों ने संबंधित पंचायत और प्रशासन से मांग की है कि इंदागांव के कच्चे रास्तों का जल्द से जल्द सुधार कराया जाए। जरूरत वाले स्थानों पर मिट्टी-मुरुम डालकर रास्ते को चलने लायक बनाने के साथ ही स्थायी सड़क निर्माण की दिशा में भी पहल की जाए, ताकि बरसात के दिनों में बच्चों और ग्रामीणों को इस तरह की परेशानी न उठानी पड़े।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध होने से गांव के विद्यार्थियों के साथ-साथ किसानों, बुजुर्गों और अन्य ग्रामीणों को भी बड़ी राहत मिलेगी।



