गरियाबंद। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित योजनाओं की चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। गरियाबंद जिले के देवभोग विकासखंड में कृषि सखी, पशु सखी एवं उद्योग सखी के चयन में कथित अनियमितता और पक्षपात के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि लिखित परीक्षा महज औपचारिकता बनकर रह गई और चयन में विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों के करीबी महिला समूह सदस्यों को प्राथमिकता दी गई।

चयन प्रक्रिया के तहत ब्लॉक मुख्यालय देवभोग में विभिन्न क्लस्टरों की महिला स्व-सहायता समूह सदस्यों की लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद चयन सूची जारी होने पर कई अभ्यर्थियों ने प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि चयन पहले से तय था और परीक्षा केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए आयोजित की गई।
परीक्षा के बावजूद चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि लिखित परीक्षा आयोजित करने का उद्देश्य निष्पक्ष चयन का संदेश देना था, लेकिन अंतिम चयन में योग्यता के बजाय विभाग से जुड़े कुछ लोगों के करीबी अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया। मामले में लंबे समय से क्लस्टर स्तर पर कार्यरत लेखापाल, कंप्यूटर ऑपरेटर, पीआरपी तथा अन्य कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
ब्लॉक समन्वयक का पक्ष
मामले में ब्लॉक समन्वयक अतुल कुमार दुबे का कहना है कि चयन महिलाओं की कार्यकुशलता, दक्षता एवं पात्रता के आधार पर किया गया है। हालांकि उनके इस बयान के बाद भी अभ्यर्थियों का सवाल बरकरार है कि यदि चयन कार्यकुशलता के आधार पर ही होना था तो लिखित परीक्षा आयोजित करने का उद्देश्य क्या था।
जांच की उठी मांग
चयन प्रक्रिया से असंतुष्ट अभ्यर्थियों और स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा चयन सूची, प्राप्तांक और मूल्यांकन प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि स्वतंत्र जांच कराई जाए तो चयन प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न होगा, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण के उद्देश्य से संचालित इस योजना की विश्वसनीयता भी प्रभावित हो सकती है।

