गरियाबंद | मध्य भारत के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा को लेकर एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) के एंटी-पोचिंग दल ने ऑपरेशन “सेफ पैसेज” के तहत एक सुनियोजित और बड़े अंतर्राज्यीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस संयुक्त कार्रवाई में दो बाघों की खाल और भारी मात्रा में पैंगोलिन के शल्क जब्त किए गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रारंभिक जांच में पकड़े गए मुख्य आरोपी महाराष्ट्र पुलिस विभाग के कर्मचारी निकले हैं।
केंद्रीय एजेंसियों और पुलिस का संयुक्त महा-अभियान वाइल्डलाइफ जस्टिस कमीशन से मिली एक बेहद सटीक गुप्त सूचना के आधार पर इस बड़े काउंटर पोचिंग ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। इस हाई-प्रोफाइल अभियान में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी-पोचिंग यूनिट, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) की केंद्रीय (मुंबई) व पश्चिम (भोपाल) टीमें, राज्य स्तरीय फ्लाइंग स्क्वॉड, पश्चिम भानुप्रतापपुर वन मंडल और गरियाबंद व गढ़चिरौली पुलिस ने मिलकर बैकएंड सहयोग से काम किया।
मोटरसाइकिल से ले जा रहे थे बाघ की खाल, दो आरोपी गिरफ्तार संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर दो आरोपियों—बाबूराव मडावी और बिजेश्वर गेडाम को रंगे हाथों दबोचा। ये दोनों एक मोटरसाइकिल पर दो बाघों की खाल की तस्करी कर रहे थे। इस मामले में पश्चिम परलकोट परिक्षेत्र (कांकेर जिला) द्वारा वन अपराध प्रकरण क्रमांक 390/09 (दिनांक 29 जून 2026) दर्ज कर दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। इसी कड़ी में आगे कार्रवाई करते हुए इंद्रावती टाइगर रिजर्व की टीम ने बीजापुर जिले के ग्राम नेटीवाड़ा से तुलसीराम मज्जी नामक एक और शिकारी को गिरफ्तार किया है।
घर से मिले 5 किलो पैंगोलिन शल्क, अबूझमाड़ में हुआ था शिकार पकड़े गए आरोपी बिजेश्वर गेडाम (निवासी अहेरी, गढ़चिरौली) के घर पर जब छापेमारी की गई, तो वहां से लगभग 5 किलोग्राम पैंगोलिन के शल्क (Pangolin Scales) भी बरामद हुए। प्रारंभिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि जब्त किए गए बाघों का शिकार इंद्रावती टाइगर रिजर्व-अबूझमाड़ क्षेत्र में किया गया था, जो बाघों का एक बेहद संवेदनशील और प्रमुख आवास क्षेत्र माना जाता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह 400 किलोमीटर का बाघ गलियारा? यह पूरा ऑपरेशन गढ़चिरौली, इंद्रावती, अबूझमाड़, उदंती-सीतानदी से लेकर ओडिशा के सुनाबेड़ा वन्यजीव अभयारण्य को जोड़ने वाले करीब 400 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को सुरक्षित करने के प्रयासों का हिस्सा है। महाराष्ट्र के जंगलों से निकलने वाले बाघ इसी रास्ते का उपयोग कर नए सुरक्षित ठिकानों की तलाश में छत्तीसगढ़ पहुंचते हैं। बाघों के अलावा यह गलियारा एशियाई हाथियों, गौर (भारतीय बाइसन) और जंगली भैंसों के सुरक्षित आवागमन के लिए भी बेहद खास है।
वन विभाग की जीरो टॉलरेंस नीति उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की टीम लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय है। इससे पहले वर्ष 2023 में भी टीम ने दो बड़े अभियानों में बाघों की खाल जब्त कर शिकारी गिरोहों को नेस्तनाबूद किया था, जबकि अप्रैल 2026 में अबूझमाड़ क्षेत्र से 9 विशाल भारतीय गिलहरियों का शिकार करने वाले को भी दबोचा गया था। वन विभाग ने साफ कर दिया है कि वन्यजीव अपराधों के खिलाफ उनकी “शून्य सहनशीलता” (Zero Tolerance) की नीति जारी रहेगी और इस कॉरिडोर को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा।





