मैनपुर (शोभा) | एक तरफ जहाँ सरकार ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के नाम पर अपनी पीठ थपथपाते नहीं थक रही है और विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं धरातल पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शिक्षा विभाग के खोखले दावों की पोल खोलती एक शर्मनाक तस्वीर मैनपुर ब्लॉक के ग्राम शोभा से सामने आई है, जहाँ का शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा है।
सैकड़ों बच्चों के लिए एक भी शौचालय नहीं शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल शोभा में कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक की कक्षाएं संचालित होती हैं। इस स्कूल में आसपास के सैकड़ों बच्चे अपना भविष्य संवारने आते हैं। लेकिन प्रशासन की घोर लापरवाही का आलम यह है कि आज तक इस स्कूल में छात्र-छात्राओं के लिए शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है।
छात्राएं और स्टाफ सबसे ज्यादा परेशान शौचालय विहीन इस स्कूल में सबसे ज्यादा परेशानी छात्राओं और महिला स्टाफ को उठानी पड़ती है। स्कूल भवन में लड़कों, लड़कियों और यहाँ तक कि शिक्षकों (स्टाफ) के लिए भी प्रसाधन की कोई व्यवस्था नहीं है। प्राकृतिक नित्यकर्म के लिए बच्चों और शिक्षकों को किन शर्मनाक और असहज स्थितियों से गुजरना पड़ता है, यह किसी से छिपा नहीं है।
स्वच्छ भारत के दावों पर उठते सवाल इस स्थिति ने सरकार और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहाँ देश भर में हर घर और स्कूल में शौचालय बनवाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं शोभा के इस हायर सेकेंडरी स्कूल में शौचालय बनवाना अधिकारियों ने जरूरी ही नहीं समझा।
ग्रामीणों और छात्रों में प्रशासन के प्रति भारी रोष है। अब देखना यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद क्या कुंभकर्णी नींद सो रहा शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन जागता है, या फिर शोभा के बच्चे यूँ ही बिना शौचालय के पढ़ने को मजबूर रहेंगे।





