गरियाबंद। आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक सशक्तिकरण को नई दिशा देने वाले एक महत्वपूर्ण आयोजन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गरियाबंद जिले के दर्रापारा में निर्मित कचना धुरवा गोंडवाना
भवन का लोकार्पण किया। लगभग 1 करोड़ 7 लाख रुपये की लागत से बने इस भवन को समाज की सांस्कृतिक, सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का आदिवासी परंपरा के अनुरूप पगड़ी पहनाकर तथा पीले चावल का तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया गया।
लोकार्पण कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने परिसर स्थित देवठाना में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत पीपल का पौधा रोपकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, समाज प्रमुखों और स्थानीय नागरिकों ने भी वृक्षारोपण कर प्रकृति संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
आदिवासी गौरव और संस्कृति का प्रतीक बनेगा भवन
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि कचना धुरवा की भूमि आदिवासी समाज की आस्था, परंपरा और गौरवशाली विरासत का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास जताया कि नव निर्मित गोंडवाना भवन केवल एक भवन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति, इतिहास और मूल्यों से जोड़ने वाला सशक्त मंच बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज तभी मजबूत होता है जब वह अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है। सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और नई पीढ़ी तक उसका हस्तांतरण किसी भी समाज के स्थायी विकास की आधारशिला है।
विकास योजनाओं की दी जानकारी
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत प्रदेश में 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 10.60 लाख से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान का मूल्य दिया जा रहा है, जबकि तेंदूपत्ता संग्राहकों को 5500 रुपये प्रति मानक बोरा भुगतान किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है।
गरियाबंद और बस्तर में बदला विकास का परिदृश्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय नक्सल प्रभावित रहे गरियाबंद और बस्तर क्षेत्र आज विकास और विश्वास की नई कहानी लिख रहे हैं। नियद नेल्लानार योजना के जरिए दूरस्थ गांवों तक सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि श्रीरामलला दर्शन योजना के तहत अब तक 42 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या की यात्रा कर चुके हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का लाभ भी बड़ी संख्या में लोगों को मिल रहा है।
गोंडवाना भवन परिसर के विकास के लिए 63 लाख रुपये की घोषणा
कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण मुख्यमंत्री द्वारा की गई 63 लाख रुपये की अतिरिक्त विकास राशि की घोषणा रही। इस राशि से गोंडवाना भवन परिसर में विभिन्न विकास कार्य कराए जाएंगे।
घोषित राशि में—
- 27 लाख रुपये बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए
- 20 लाख रुपये ग्रंथालय निर्माण के लिए
- 6 लाख रुपये भगवान कचना धुरवा की प्रतिमा स्थापना के लिए
- 10 लाख रुपये परिसर के सौंदर्यीकरण कार्य के लिए
स्वीकृत किए गए हैं।
समाज को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनने का आह्वान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि लगभग ढाई एकड़ क्षेत्र में निर्मित यह भवन समाज के सामाजिक और शैक्षणिक विकास का नया केंद्र बनेगा। उन्होंने समाज के युवाओं से शिक्षा को प्राथमिकता देने, संगठित रहने और आत्मनिर्भर बनने का आह्वान किया। साथ ही प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम में खाद्य मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल, महासमुंद लोकसभा क्षेत्र की सांसद रूपकुमारी चौधरी, राजिम विधायक रोहित साहू, गोंड महासभा के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।
सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
कचना धुरवा गोंडवाना भवन का लोकार्पण आदिवासी समाज की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह भवन भविष्य में सामाजिक समरसता, शैक्षणिक गतिविधियों और सांस्कृतिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनकर समाज की नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का कार्य करेगा।




आदिवासी गौरव और संस्कृति का प्रतीक बनेगा भवन
