संकल्प अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, सैनिटरी पैड वितरित कर बनाया सहायता बॉक्स
मैनपुर। आदिवासी बहुल विकासखंड मैनपुर के ग्राम गोना स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला में संकल्प अभियान के अंतर्गत किशोर बालिकाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और मासिक धर्म प्रबंधन को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं को मासिक धर्म के दौरान आवश्यक सावधानियों, व्यक्तिगत साफ-सफाई और स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
विद्यालय के विज्ञान शिक्षक पेश्वर यादव ने किशोरावस्था के दौरान बालिकाओं के शरीर और मन में आने वाले बदलावों को सरल एवं वैज्ञानिक तरीके से समझाया। उन्होंने कहा कि मासिक धर्म एक सामान्य और प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है, जिसे लेकर किसी प्रकार का संकोच या भ्रम नहीं होना चाहिए। इस दौरान स्वच्छता और संतुलित खानपान का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।
उन्होंने छात्राओं को सैनिटरी पैड के सही उपयोग, तय समय पर पैड बदलने, उपयोग से पहले और बाद में हाथों को साफ रखने तथा संक्रमण से बचाव के उपायों के बारे में बताया। साथ ही उन्होंने बालिकाओं से स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या को छिपाने के बजाय शिक्षकों, अभिभावकों या स्वास्थ्यकर्मियों से खुलकर चर्चा करने की अपील की।
सैनिटरी पैड वितरित, सहायता बॉक्स स्थापित
कार्यक्रम के दौरान किशोर बालिकाओं को सैनिटरी पैड वितरित किए गए। विद्यालय परिसर में मासिक धर्म स्वच्छता सहायता बॉक्स भी स्थापित किया गया है, ताकि जरूरत के समय छात्राओं को आवश्यक सामग्री और सहयोग सहज रूप से उपलब्ध हो सके।
बालिकाओं को सुरक्षित, सहयोगपूर्ण और संकोचमुक्त वातावरण देने के उद्देश्य से विद्यालय में सखी सहयोग टीम का गठन भी किया गया है। इसके माध्यम से छात्राएं अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बिना झिझक साझा कर सकेंगी और आवश्यक मार्गदर्शन प्राप्त कर सकेंगी।
जागरूकता से बढ़ी स्कूल में निरंतरता
शिक्षकों ने बताया कि आदिवासी बहुल क्षेत्र में कई परिवारों में किशोरावस्था और मासिक धर्म से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी का अभाव रहता है। इसके कारण बालिकाओं को सामाजिक संकोच, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और कई बार विद्यालय में अनियमित उपस्थिति जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है।
विद्यालय द्वारा लगातार संवाद, जागरूकता और सहयोग के माध्यम से छात्राओं को स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इसका सकारात्मक प्रभाव बालिकाओं की नियमित उपस्थिति और पढ़ाई की निरंतरता पर दिखाई देने लगा है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के प्रधान पाठक सूरज प्रसाद पात्र एवं विज्ञान शिक्षक पेश्वर यादव का विशेष योगदान रहा।


