मैनपुर: गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक में आज (30 जून) आयोजित ‘जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव’ के दौरान भारी राजनीतिक गहमागहमी और तनाव देखने को मिला। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर महासमुंद लोकसभा क्षेत्र की सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी शामिल होने पहुंची थीं।
इसी दौरान, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मैनपुर द्वारा जर्जर स्कूल भवनों की गंभीर समस्या को लेकर सांसद और भाजपा सरकार को काले झंडे दिखाने की योजना थी। लेकिन, कार्यक्रम में किसी भी प्रकार के व्यवधान को टालने के लिए मैनपुर पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन करने से पहले ही रोक दिया और उन्हें नजरबंद कर लिया।
क्या है विरोध का मुख्य कारण?
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने प्रशासन और सरकार पर शिक्षा व्यवस्था में भारी लापरवाही के आरोप लगाए हैं। विरोध के प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
जर्जर और अधूरे स्कूल भवन: मैनपुर मुख्यालय के शासकीय स्कूल भवन पिछले कई वर्षों से जर्जर अवस्था में हैं और उनका निर्माण कार्य अभी भी अधूरा पड़ा है।
छत विहीन कमरों में पढ़ाई: हालात इतने बदतर हैं कि स्कूली बच्चों को ऐसे स्थानों पर बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जहां उनके सिर के ऊपर ठीक से छत तक नहीं है।
सुरक्षा से सीधा खिलवाड़: खस्ताहाल भवनों में पढ़ाई करने से मासूम स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर हर समय गंभीर खतरा मंडराता रहता है।
जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा: स्कूल के मुद्दे के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की हो रही उपेक्षा को लेकर भी कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश था

पुलिस की कार्रवाई और सांसद को सौंपा गया ज्ञापन

शाला प्रवेशोत्सव कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके, इसके लिए मैनपुर पुलिस ने विरोध प्रदर्शन करने जा रहे कांग्रेसियों को रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस द्वारा उन्हें काले झंडे दिखाने की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें नजरबंद (डिटेन) कर लिया गया।
हालाँकि, पुलिस प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि उनकी आवाज़ जनप्रतिनिधि तक पहुंचे। कार्यक्रम की समाप्ति के बाद, नजरबंद किए गए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को महासमुंद सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी से मुलाकात करने का समय दिया गया। इसके पश्चात कार्यकर्ताओं ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर सांसद महोदया को एक ज्ञापन सौंपा और स्कूल भवनों के तत्काल मरम्मत और निर्माण की मांग की।

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मैनपुर ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि जब तक बच्चों को पूर्ण और सुरक्षित स्कूल भवन उपलब्ध नहीं कराए जाते, तब तक वे इस मुद्दे को इसी तरह मजबूती से उठाते रहेंगे, क्योंकि बच्चों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।






