गरियाबंद। जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र गरगट्टी परसुली में 1 से 5 अक्टूबर 2026 तक पांच दिवसीय कोयापुनेम धर्म दर्शन (गोंडी गाथा) का आयोजन किया जाएगा। आयोजन स्थल परमेश्वरी मंदिर के पास ग्राम गरगट्टी परसुली बताया गया है। आयोजन स्व. ईश्वरी सिंह ध्रुव की स्मृति में मानकी बाई ध्रुव, सूर्यदेव-वोमेश्वर, अनिल-यशोदा, दुर्गेश-दामिनी, ओटी परिवार एवं समस्त आदिवासी ध्रुव गोंड समाज गरगट्टी परसुली तथा नवागांव सर्कल-गुजरा (बिंद्रानवागढ़ राज) के सहयोग से किया जा रहा है।
आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का उद्देश्य गोंडी संस्कृति, परंपरा, धार्मिक मान्यताओं और गोंडी गाथाओं से समाज की नई पीढ़ी को परिचित कराना है। कोयापुनेम को गोंड समुदाय की स्वदेशी धार्मिक परंपरा के रूप में वर्णित किया जाता है और इसे प्रकृति तथा गोंडी जीवन-पद्धति से जुड़ी मान्यताओं के साथ जोड़ा जाता है।
पांच दिनों में अलग-अलग गाथाओं का होगा वाचन
कार्यक्रम में जिला सिवनी, मध्यप्रदेश के धर्माचार्य एवं गोंडी गाथा वाचक शंकर शाह इरपाचे के सानिध्य में प्रतिदिन कथा एवं गाथा का वाचन किया जाएगा। आयोजन के पोस्टर के मुताबिक कथा का समय प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक रहेगा, जबकि दोपहर 1 बजे भोजन अवकाश रखा गया है।
पहला दिन – 1 अक्टूबर, गुरुवार
जीव-जगत की उत्पत्ति कैसे हुई, इस विषय पर गाथा एवं धर्म दर्शन प्रस्तुत किया जाएगा।
दूसरा दिन – 2 अक्टूबर, शुक्रवार
पहांदी पारी कुपार लिंगो की गाथा का वाचन होगा।
तीसरा दिन – 3 अक्टूबर, शनिवार
कली कंकालीन दाई की जन्म गाथा प्रस्तुत की जाएगी।
चौथा दिन – 4 अक्टूबर, रविवार
गोत्र व्यवस्था, तैंतीस कोट बच्चों की गाथा तथा धर्मगुरु पाहंदी पारी कुपारलिंगो से जुड़ी परंपराओं पर कथा होगी।
पांचवां दिन – 5 अक्टूबर, सोमवार
शंभू मुला दाई विवाह गाथा के साथ पांच दिवसीय कोयापुनेम धर्म दर्शन गाथा का समापन किया जाएगा।
संस्कृति और पहचान से जोड़कर देखा जा रहा आयोजन
आयोजकों का कहना है कि बदलते सामाजिक परिवेश में पारंपरिक संस्कृति, बोली, रीति-रिवाज और धार्मिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से गोंडी गाथाओं के माध्यम से समाज के इतिहास और सांस्कृतिक परंपराओं को समझाने का प्रयास किया जा रहा है।
गोंडी परंपरा पर उपलब्ध स्रोतों में भी प्रकृति-आधारित आस्था, सामुदायिक परंपराओं और कोयापुनेम को गोंड समाज की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी परंपरा के रूप में उल्लेखित किया गया है।
अधिक संख्या में शामिल होने की अपील
आयोजकों और अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, गरियाबंद की ओर से जिले के मूलनिवासी एवं आदिवासी समाज के लोगों से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर गोंडी गाथाओं का श्रवण और दर्शन करने की अपील की गई है।
आयोजन के पोस्टर में कार्यक्रम को “स्व. श्री ईश्वरी सिंह ठाकुर की स्मृति में आयोजित पांच दिवसीय कोयापुनेम धर्म दर्शन (गोंडी गाथा)” बताया गया है।



