गरियाबंद। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और मछुआरा समुदाय की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसी क्रम में मत्स्य पालन विभाग द्वारा संचालित राज्य पोषित योजना के तहत गरियाबंद जिले के ग्राम चिखली के हितग्राही लीलांबर निषाद एवं पुखराज निषाद को मछली पकड़ने के लिए मछली जाल प्रदान किया गया।
हितग्राहियों ने बताया कि वे मछली पालन के साथ-साथ मछली पकड़ने का कार्य भी करते हैं। इसके लिए वे गांव के समीप स्थित सेम्हरधाप, जशपुर, नवाडीह पेंड्रा तथा गरियाबंद क्षेत्र के विभिन्न तालाबों में 10 से 12 लोगों की टीम के साथ संगठित रूप से मछली पकड़ने का कार्य करते हैं।
उन्होंने बताया कि पहले मछली पकड़ने के लिए जाल किराए पर लेना पड़ता था, जिसके लिए प्रतिदिन प्रति जाल 200 से 300 रुपये तक खर्च करना पड़ता था। मछली पकड़ने के कार्य से उन्हें औसतन 500 रुपये प्रतिदिन की आय प्राप्त होती थी। अब विभाग द्वारा स्वयं का मछली जाल उपलब्ध कराए जाने से किराए का अतिरिक्त खर्च पूरी तरह बच जाएगा, जिससे उनकी शुद्ध आय में वृद्धि होगी और आर्थिक लाभ भी बढ़ेगा।
आर्थिक स्थिति में आएगा सुधार
लीलांबर निषाद और पुखराज निषाद ने कहा कि स्वयं का मछली जाल मिलने से कार्य करने में सुविधा बढ़ेगी, उत्पादन में वृद्धि होगी और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने बताया कि इस सहायता से उनके जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा तथा भविष्य में मत्स्य व्यवसाय को और अधिक विस्तार देने में मदद मिलेगी।
हितग्राहियों ने शासन की इस पहल को मछुआरा समुदाय के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मछुआरों को आत्मनिर्भर बनने और अपनी आजीविका को सशक्त बनाने में सहायता मिल रही है।
शासन की योजनाएं बदल रही ग्रामीणों का जीवन
हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय तथा मत्स्य पालन विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की जनहितैषी योजनाएं न केवल मछुआरों को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही हैं, बल्कि उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
राज्य सरकार द्वारा संचालित ऐसी योजनाएं ग्रामीण अंचलों के जरूरतमंद परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ रोजगार और आय के नए अवसर भी उपलब्ध करा रही हैं, जिससे गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।





