बस्तर जिले में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में मत्स्य विभाग तेजी से काम कर रहा है। मानसून की शुरुआत के साथ जिले में मछलीपालन गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है। विभाग ने इस वर्ष अब तक 7 करोड़ 25 लाख से अधिक मत्स्य बीज तैयार कर मत्स्यपालकों और किसानों को उपलब्ध कराया है। इसके साथ ही जिला अपने 9 करोड़ 50 लाख मत्स्य बीज उत्पादन लक्ष्य को पूरा करने के करीब पहुंच गया है।
लक्ष्य के करीब पहुंचा जिला
उपसंचालक मत्स्यपालन मोहन राणा ने बताया कि वर्ष 2026 के लिए जिले में 9.50 करोड़ मत्स्य बीज उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके मुकाबले अब तक 7.25 करोड़ से अधिक मत्स्य बीज का उत्पादन हो चुका है। तैयार मत्स्य बीज का वितरण मत्स्य बीज उत्पादन केंद्र बालेंगा और मछली बीज प्रक्षेत्र मोती तालाब पारा, जगदलपुर से किया जा रहा है, जिससे जिले के मत्स्यपालकों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध हो सके।
मानसून के साथ तेज हुआ बीज वितरण अभियान

बारिश शुरू होते ही विभाग ने मत्स्य बीज वितरण अभियान को और गति दे दी है। जिन मौसमी तालाबों में सात से आठ महीने तक पानी उपलब्ध रहता है, वहां स्पान संवर्धन योजना के तहत फ्राई और अंगुलिका तैयार कर अन्य किसानों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे स्थानीय स्तर पर ही मत्स्य बीज की उपलब्धता बढ़ेगी और उत्पादन लागत में भी कमी आएगी।
13 मत्स्यपालकों को मिला 3.25 करोड़ मत्स्य बीज
विभाग के अनुसार अब तक 13 मत्स्यपालकों को 3 करोड़ 25 लाख मत्स्य बीज वितरित किए जा चुके हैं। ये मत्स्यपालक स्पान से फ्राई और अंगुलिका तैयार कर आगे अन्य किसानों एवं मत्स्यपालकों को बीज उपलब्ध कराएंगे। इससे जिले में मत्स्य बीज उत्पादन की श्रृंखला मजबूत होगी और छोटे किसानों को भी समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज मिल सकेगा।
महिला समूहों और सहकारी समितियों को भी मिलेगा लाभ
इस वर्ष मत्स्य विभाग ने केवल व्यक्तिगत मत्स्यपालकों तक ही योजनाओं को सीमित नहीं रखा है। मछुआ सहकारी समितियों और
महिला स्व-सहायता समूहों को भी उपलब्ध जलाशयों का लीज आवंटित किया गया है। इससे सामूहिक रूप से मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर जैसे जल संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र में वैज्ञानिक तरीके से मछलीपालन को बढ़ावा देने से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। समय पर गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज की उपलब्धता, प्रशिक्षण और जलाशयों के बेहतर उपयोग से जिले में मत्स्य उत्पादन बढ़ेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।






