मैनपुर। मैनपुर विकासखंड के वनांचल ग्राम छिंदौला में करोड़ों की लागत से बन रहे एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय परिसर में पिछले करीब दो वर्षों से काटे गए पेड़ों के लट्ठे और लकड़ियां खुले में पड़ी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि धूप और बारिश में पड़े रहने से यह काष्ठ सड़कर खराब हो रहा है, जिससे शासन को लाखों रुपये के संभावित राजस्व नुकसान की आशंका है।
विद्यालय भवन का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इसके वर्चुअल उद्घाटन का प्रस्ताव बताया जा रहा है। उद्घाटन से पहले परिसर की सफाई और विभाग को हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी होनी है, लेकिन परिसर में जमा लकड़ियों के कारण साफ-सफाई, समतलीकरण और अंतिम निर्माण कार्यों में बाधा की बात सामने आई है।
पेड़ कटाई के बाद परिसर में ही बना दिया लकड़ियों का चट्टा
विद्यालय निर्माण शुरू होने के दौरान वर्ष 2022-23 में परिसर क्षेत्र के छोटे-बड़े पेड़ों की कटाई की गई थी। कटे हुए पेड़ों के बड़े लट्ठे और अन्य लकड़ियों को परिसर में ही एक स्थान पर चट्टा बनाकर रख दिया गया।
आरोप है कि इसके बाद न तो लकड़ियों को वन विभाग के डिपो तक पहुंचाया गया और न उनकी नीलामी कराई गई। खुले आसमान के नीचे लगातार धूप, बारिश और नमी झेलने के कारण लकड़ियों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इनका उठाव या वैधानिक नीलामी की प्रक्रिया होती, तो शासन को राजस्व प्राप्त हो सकता था।
हैंडओवर से पहले सफाई की जिम्मेदारी, फिर भी नहीं हुआ उठाव
निर्माण कार्य पूरा होने के बाद ठेकेदार को परिसर की सफाई कर भवन हैंडओवर करना है। लेकिन लकड़ियों का ढेर लंबे समय से परिसर में मौजूद होने से अंतिम सफाई और व्यवस्था बनाने में भी परेशानी आ रही है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि लकड़ियों की तत्काल गणना कराई जाए, उनकी वर्तमान स्थिति का पंचनामा बनाया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि कितनी लकड़ी उपयोग योग्य बची है तथा कितनी खराब हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि मामले में संबंधित विभागों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
वन विभाग ने ठेकेदार की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सामान्य वन मंडल गरियाबंद के डीएफओ मयंक पाण्डे ने कहा कि कटाई के समय ठेकेदार द्वारा नियमानुसार कार्य नहीं किया गया। उनके अनुसार, ठेकेदार ने स्वयं पेड़ों की कटाई कर ली थी।
डीएफओ ने कहा,
“नियम के तहत ठेकेदार को विभाग में कुछ राशि जमा करानी चाहिए थी, जो नहीं की गई। हमारे द्वारा पेड़ों की मार्किंग की गई थी, लेकिन राशि जमा नहीं होने के कारण हम इन लकड़ियों का परिवहन नहीं कर सकते। इस पूरे मामले में वन विभाग की कोई जिम्मेदारी नहीं है।”
कटाई और लकड़ी के प्रबंधन से संबंधित प्रक्रियाओं में विभागीय अनुमति, चिन्हांकन और वैधानिक व्यवस्था का पालन जरूरी होता है। वन संपदा और काष्ठ के भंडारण/परिवहन से जुड़े मामलों में प्रशासनिक निगरानी का महत्व इसी कारण बढ़ जाता है।
अपर कलेक्टर ने कहा—डीएफओ से बात कर होगी कार्रवाई
मामले को लेकर अपर कलेक्टर गरियाबंद पंकज डहिरे ने कहा कि उन्हें डंप लकड़ियों और संभावित राजस्व नुकसान की जानकारी मिली है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में डीएफओ गरियाबंद से चर्चा कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि कटाई की अनुमति किस आधार पर हुई, लकड़ी की मात्रा कितनी थी, उसका मूल्यांकन हुआ या नहीं, ठेकेदार से निर्धारित राशि क्यों नहीं ली गई और दो साल तक लकड़ियां परिसर में क्यों पड़ी रहीं।
आदिवासी बच्चों की शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण परियोजना
छिंदौला में बन रहा एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय आदिवासी और दूरस्थ वनांचल क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्ता-युक्त शिक्षा के साथ छात्रावास की सुविधा देने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। एकलव्य विद्यालयों का उद्देश्य दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना है।
विद्यालय परिसर के जल्द शुरू होने की उम्मीद के बीच स्थानीय लोगों की मांग है कि उद्घाटन से पहले डंप लकड़ियों के मामले का समाधान किया जाए, परिसर को पूरी तरह साफ कराया जाए और राजस्व को हुए संभावित नुकसान के संबंध में जिम्मेदारी तय की जाए।




