गरियाबंद। गरियाबंद शहर सहित जिले के विभिन्न नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या लोगों के लिए चिंता का कारण बनती जा रही है। सुबह-शाम सड़कों, बाजारों, स्कूलों, बस स्टैंड, अस्पतालों और मोहल्लों में कुत्तों के झुंड घूमते नजर आ रहे हैं, जिससे बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और दोपहिया वाहन चालकों में भय का माहौल है।
लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर आवारा कुत्ते राहगीरों के पीछे दौड़ते हैं और रात के समय झुंड बनाकर सड़कों पर बैठे रहते हैं। इससे दुर्घटना और काटने की घटनाओं की आशंका बनी रहती है। प्रदेश स्तर पर भी आवारा कुत्तों के पंजीयन, नसबंदी और टीकाकरण के लिए निकायों को निर्देश दिए गए हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की मांग उठ रही है।
बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर सवाल
ग्रामीणों और शहरवासियों का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है। बच्चे स्कूल जाने या खेलते समय कुत्तों के झुंड से डरते हैं, जबकि बुजुर्ग सुबह-शाम टहलने निकलते समय असुरक्षित महसूस करते हैं।
रात के समय पैदल चलने वालों और बाइक सवारों के लिए भी स्थिति जोखिमपूर्ण बताई जा रही है। अचानक कुत्तों के दौड़ने या भौंकने से दोपहिया चालक घबरा जाते हैं, जिससे सड़क हादसे की आशंका बनी रहती है।
देश के कई हिस्सों में हाल के दिनों में आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे मामलों ने स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी और पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं।
कचरे के ढेर बन रहे समस्या की वजह
लोगों के अनुसार, खुले में पड़े भोजन के अवशेष और कचरे के ढेर आवारा कुत्तों के झुंड बढ़ने की बड़ी वजह हैं। होटल, ठेले, बाजार और मोहल्लों के आसपास बचा हुआ खाना फेंके जाने से कुत्ते इन स्थानों पर जमा रहते हैं।
नागरिकों ने नगर पालिका, नगर पंचायत और ग्राम पंचायतों से नियमित कचरा उठाव, सार्वजनिक स्थानों की सफाई और खाद्य अपशिष्ट के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल कुत्तों को पकड़ने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा; सफाई, नसबंदी, रेबीज-रोधी टीकाकरण और जनजागरूकता को साथ लेकर चलना होगा।
नसबंदी और टीकाकरण अभियान की मांग
छत्तीसगढ़ सरकार ने आवारा कुत्तों और बेसहारा पशुओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए भारत पशुधन पोर्टल पर पंजीयन की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसमें नसबंदी और टीकाकरण जैसी गतिविधियों की ट्रैकिंग भी की जानी है।
प्रदेश में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रण और रेबीज के जोखिम को कम करने के लिए 34 पशु जन्म नियंत्रण केंद्र स्थापित किए जाने की जानकारी दी गई है। इन केंद्रों में कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का प्रावधान है।
गरियाबंद जिले के नागरिकों की मांग है कि शहर और सभी नगरीय निकाय क्षेत्रों में सर्वे कर आवारा कुत्तों की पहचान की जाए। इसके बाद पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियमों के अनुसार मानवीय तरीके से नसबंदी, एंटी-रेबीज टीकाकरण और चिन्हांकन की कार्रवाई की जाए।
काटने पर क्या करें?
यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता काट ले, तो घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए और बिना देरी किए नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटी-रेबीज टीका लगवाना चाहिए। कुत्ते के काटने को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
नागरिकों से अपील की गई है कि वे कुत्तों को उकसाने, पत्थर मारने या उनके झुंड के बीच जाने से बचें। बच्चों को भी समझाया जाए कि अनजान कुत्तों को छेड़ने या उनके पास खाने की वस्तु लेकर जाने से बचें।
प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
लोगों ने प्रशासन और संबंधित निकायों से मांग की है कि आवारा कुत्तों की समस्या को गंभीरता से लिया जाए। लोगों ने संवेदनशील स्थानों—स्कूल, आंगनबाड़ी, अस्पताल, बाजार, बस स्टैंड और प्रमुख मोहल्लों—में प्राथमिकता से सर्वे, नसबंदी और टीकाकरण अभियान चलाने की मांग की है।
नागरिकों का कहना है कि सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाते हुए वैज्ञानिक व मानवीय उपाय अपनाना जरूरी है। यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में जिलेभर में आवारा कुत्तों का संकट और गंभीर हो सकता है।


