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रिपोर्ट.!पन्नू नेताम
दर्रीपारा (गरियाबंद )। दर्रीपारा के समीप स्थित ग्राम आमागाँव में 17 अक्टूबर, शनिवार को पारंपरिक देव दशहरा पर्व का आयोजन किया जाएगा। चिपराहा नेताम परिवार द्वारा प्रतिवर्ष आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व में 36 गांवों में निवासरत नेताम परिवार के लगभग 110 परिवारों के सदस्य तथा आमंत्रित सगा-संबंधी शामिल होंगे।
300 वर्षों से चली आ रही परंपरा

नेताम परिवार के प्रमुख गोविंद नेताम एवं भोला सिंह नेताम ने बताया कि उनके परिवार का मुख्य ग्राम चिपरी है। देव दशहरा की परंपरा कब से प्रारंभ हुई, इसकी सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालांकि, परिवार की जानकारी के अनुसार यह परंपरा लगभग 300 वर्षों से चली आ रही है।
इस अवसर पर कुल के प्रमुख देवी-देवताओं एवं पेन शक्तियों की पूजा-पाठ रूढ़ि-परंपराओं और गोंडी संस्कृति के अनुसार की जाती है। यह पर्व परिवार की आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
धान की मिंजाई का कार्य होगा प्रारंभ
देव दशहरा पर्व का कृषि कार्यों से भी विशेष संबंध है। इस त्योहार के आयोजन के बाद गांव में गाड़ियों के माध्यम से धान की फसल लाई जाती है तथा मिंजाई का कार्य प्रारंभ किया जाता है। इस प्रकार यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ कृषि परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है।
रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम का होगा आयोजन
आयोजन को लेकर तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं। पर्व के अवसर पर मनोरंजन के लिए रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत रंग बरसा छत्तीसगढ़ी नाच पार्टी, अमलोर की प्रस्तुति रखी गई है।
इस आयोजन को सफल बनाने के लिए नूतन बाल मंडली, प्रतिभा विकास एवं युवा जागरण समिति के सभी सदस्य सक्रिय रूप से तैयारियों में जुटे हुए हैं। देव दशहरा के माध्यम से चिपराहा नेताम परिवार अपनी प्राचीन परंपराओं, गोंडी संस्कृति और सामाजिक एकजुटता को आगे बढ़ाने की तैयारी में है।


