गरियाबंद । जिले के धवलपुरडीह गांव में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुराने नजरी नक्शे एवं भूमि अभिलेख उपलब्ध नहीं होने के कारण पटवारी, राजस्व निरीक्षक (आरआई) और तहसील कार्यालय द्वारा मनमाने ढंग से सीमांकन किया जा रहा है, जिससे गांव में भूमि विवाद की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि अपने ही मालिकाना हक की जमीन को बचाने के लिए लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है। कई मामलों में सीमांकन के दौरान वास्तविक कब्जाधारी और राजस्व रिकॉर्ड धारकों की भूमि किसी अन्य व्यक्ति के नाम चिन्हित कर दिए जाने के आरोप सामने आए हैं।
टंकेश चक्रधारी की जमीन किसी और को देने का आरोप
धवलपुरडीह के निवासी टंकेश चक्रधारी का आरोप है कि उनके पूर्वजों के समय से काबिज राजस्व भूमि को सीमांकन प्रक्रिया में किसी अन्य व्यक्ति चैतन निषाद के नाम पर दर्शाया जा रहा है। जबकि उनके पास राजस्व पट्टा, दस्तावेज और पूर्व सीमांकन के रिकॉर्ड मौजूद हैं।
ग्रामीणों के अनुसार यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि गांव के कई लोगों के साथ इसी प्रकार की स्थिति उत्पन्न हो रही है। लोगों का कहना है कि वर्षों से जिन जमीनों पर उनका कब्जा और अधिकार है, उन्हें अब दूसरे लोगों की भूमि बताई जा रही है।
2021 के सीमांकन में सब कुछ सही था, अब अचानक कैसे बदल गया नक्शा?
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि वर्ष 2021 में हुए सीमांकन में भूमि की स्थिति स्पष्ट थी और किसी प्रकार का विवाद नहीं था। ऐसे में अब अचानक भूमि की सीमाएं और रिकॉर्ड बदलने जैसी स्थिति क्यों उत्पन्न हो रही है?
ग्रामीण पूछ रहे हैं कि “क्या अधिकारियों के बदलने से नक्शा भी बदल जाता है?”
इस सवाल का जवाब आज तक किसी जिम्मेदार अधिकारी ने नहीं दिया है।
सरपंच के पंचनामा के बाद भी नहीं मिला न्याय

टंकेश चक्रधारी का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्या को लेकर कई बार राजस्व अधिकारियों से शिकायत की। ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच द्वारा पंचनामा तैयार कर वास्तविक स्थिति की पुष्टि भी की गई, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत की रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
विकलांग होने के बावजूद दफ्तर-दफ्तर भटकने को मजबूर टंकेश
सबसे दुखद पहलू यह है कि टंकेश चक्रधारी दिव्यांग (विकलांग) हैं, इसके बावजूद उन्हें न्याय की उम्मीद में लगातार पटवारी, आरआई और तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
परिजनों का कहना है कि आर्थिक और शारीरिक कठिनाइयों के बावजूद वे वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहे हैं।
चैतन निषाद ने खुद स्वीकारा है की जो जमीन उन्हें सीमांकन के दौरान अधिकारियों ने दिया वह जमीन टंकेश चक्रधारी के पूर्वजो की जमींन है। पूरी जानकारी हमारी यूट्यूब चैनल में है आप हमारे यूट्यूब चैनल news veb पर जाकर देख सकते है ! वीडियो लिंक
तहसील कार्यालय के बाबू पर रिश्वत मांगने का आरोप
टंकेश चक्रधारी ने आरोप लगाया है कि जब वे पूर्व सीमांकन की पावती और दस्तावेज लेने तहसील कार्यालय पहुंचे तो वहां एक बाबू द्वारा उनसे रिश्वत (घूस) की मांग की गई। हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी सक्षम एजेंसी द्वारा जांच नहीं हुई है और न ही संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आया है।
यदि यह आरोप सही पाया जाता है तो यह राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुराने नक्शे नहीं होने से मनमानी का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि धवलपुरडीह में भूमि विवादों की सबसे बड़ी वजह पुराने नजरी नक्शों और अभिलेखों का उपलब्ध नहीं होना है। इसी का फायदा उठाकर कुछ अधिकारी-कर्मचारी अपनी सुविधा अनुसार सीमांकन कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ राजस्व विभाग की ऑनलाइन व्यवस्था में भू-अभिलेख और भू-नक्शा उपलब्ध कराने की व्यवस्था है, तथा राजस्व मामलों के निराकरण हेतु न्यायालयीन प्रणाली भी संचालित है।
ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की
धवलपुरडीह के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, कलेक्टर और उच्च राजस्व अधिकारियों से मांग की है कि गांव के सभी विवादित मामलों की पुराने रिकॉर्ड, नक्शों और पूर्व सीमांकन रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मामले का समाधान नहीं किया गया तो गांव में भूमि विवाद और अधिक बढ़ सकते हैं तथा आम नागरिकों का प्रशासन से विश्वास उठ जाएगा।



टंकेश चक्रधारी की जमीन किसी और को देने का आरोप
