वनभूमि पर कब्जे के लिए पेड़ों की कटाई का आरोप, सामान्य वन मंडल की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
मैनपुर। गरियाबंद जिले के मैनपुर क्षेत्र के छोटे गोबरा बीट क्रमांक 1057 में वनभूमि पर अतिक्रमण और पेड़ों की कटाई को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। छोटे गोबरा से कांटीपारा जाने वाले मार्ग के किनारे बेशकीमती साल (सरई) समेत अन्य वन वृक्षों की कटाई किए जाने और इसके बाद जमीन पर कब्जे की कोशिश का आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किनारे वनभूमि की स्थिति लगातार बदल रही है और पेड़ों की कटाई के बाद खाली हुई जमीन पर अतिक्रमण की गतिविधियां बढ़ रही हैं।
सरकारी रिकॉर्ड में छोटे गोबरा और कांटीपारा मैनपुर क्षेत्र से जुड़े वनांचल के रूप में दर्ज हैं। ऐसे क्षेत्र में वनभूमि की सुरक्षा और नियमित निगरानी को लेकर ग्रामीणों ने वन विभाग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
सड़क किनारे कट रहे साल के पेड़, अतिक्रमण की तैयारी का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार छोटे गोबरा-कांटीपारा मार्ग के आसपास कुछ स्थानों पर पहले वन वृक्षों को काटा गया और इसके बाद जमीन को साफ करने की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पेड़ों की कटाई के बाद खाली हुई जमीन पर कब्जे की तैयारी की जा रही है।
यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला केवल अवैध वृक्ष कटाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वनभूमि पर कब्जे की सुनियोजित प्रक्रिया का भी संकेत हो सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक स्थिति विभागीय जांच, मौके के निरीक्षण और वनभूमि के सीमांकन के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
चौकीदार वृक्षारोपण में व्यस्त, जंगल की निगरानी पर सवाल
ग्रामीणों ने सामान्य वन मंडल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इन दिनों विभाग के चौकीदार और कर्मचारी वृक्षारोपण एवं हाथी निगरानी जैसे कार्य में लगाए गए हैं, जबकि जंगल की सुरक्षा, अवैध कटाई पर नजर रखने और अतिक्रमण रोकने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए नियमित निगरानी जरूरी है।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर विभाग नए पौधे लगाने पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर यदि पुराने और बेशकीमती साल वृक्षों की कटाई हो रही है तो वन संरक्षण की प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार देने की व्यवस्था पर भी सवाल
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जिन वृक्षारोपण अथवा अन्य वन कार्यों में स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिल सकता है, उनमें विभागीय चौकीदारों को लगाए जाने से ग्रामीणों के रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि विभागीय कर्मचारियों को उनके मूल दायित्व के तहत वन सुरक्षा, गश्त और निगरानी पर प्राथमिकता से लगाया जाए तथा मजदूरी आधारित कार्यों में स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
सीमांकन और पेड़ों की गिनती कराने की मांग
ग्रामीणों ने बीट क्रमांक 1057 में तत्काल जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क किनारे वनभूमि का सीमांकन कराया जाए, काटे गए पेड़ों का सत्यापन किया जाए और यह जांच की जाए कि पेड़ों की कटाई के बाद किसी व्यक्ति द्वारा वनभूमि पर कब्जा तो नहीं किया जा रहा है।
इसके साथ ही ग्रामीणों ने विभाग से यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि बीट क्षेत्र में तैनात वनकर्मी वर्तमान में किन कार्यों में लगाए गए हैं और जंगल की नियमित निगरानी किस व्यवस्था के तहत की जा रही है।
अब जांच से सामने आएगी वास्तविक स्थिति
ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए यह जरूरी है कि वन विभाग मौके पर पहुंचकर कटे हुए पेड़ों, वनभूमि की स्थिति और कथित अतिक्रमण वाले स्थानों का भौतिक सत्यापन करे।
मैनपुर क्षेत्र के जंगलों में वन संपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। क्षेत्र में वन विभाग द्वारा निगरानी और कार्रवाई भी की जाती रही है। ऐसे में बीट क्रमांक 1057 को लेकर उठे सवालों का जवाब भी मौके की जांच और विभागीय कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा।



