रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सामने आए एक अहम फैसले ने देशभर के वाहन मालिकों और ऑटोमोबाइल कंपनियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने E-20 पेट्रोल से जुड़े एक मामले में मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके डीलर के खिलाफ ऐतिहासिक आदेश पारित करते हुए कहा है कि कंपनी शिकायतकर्ता को नई E-20 अनुकूल कार उपलब्ध कराए, अन्यथा 20 लाख रुपये से अधिक की राशि वापस करे। इसे E-20 पेट्रोल से जुड़े देश के पहले प्रमुख उपभोक्ता आयोग के फैसलों में से एक माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?

रायपुर निवासी डॉ. प्रेमराज देबता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने जून 2024 में मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड खरीदी थी। उनका आरोप था कि E-20 पेट्रोल भराने के बाद वाहन में बार-बार इंजन संबंधी गंभीर समस्याएं आने लगीं। कार की परफॉर्मेंस गिरने लगी, इंजन मिसफायर होने लगा और कई बार मरम्मत कराने के बावजूद समस्या दूर नहीं हुई।
कंपनी ने क्या कहा?
मारुति सुजुकी और डीलर ने आयोग के समक्ष दलील दी कि वाहन E-20 पेट्रोल के अनुकूल है और तकनीकी खराबी का कारण सामान्य उपयोग एवं रखरखाव से जुड़ा हो सकता है। हालांकि आयोग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने माना कि जब पेट्रोल पंपों पर E-20 ईंधन व्यापक रूप से उपलब्ध है, तब उपभोक्ता से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह कोई दूसरा ईंधन तलाशे।
आयोग का ऐतिहासिक आदेश
उपभोक्ता आयोग ने आदेश दिया कि कंपनी 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता को उसी मॉडल की नई E-20 अनुकूल कार उपलब्ध कराए। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो कंपनी को वाहन की कीमत, पंजीकरण शुल्क और बीमा राशि सहित लगभग ₹20.5 लाख लौटाने होंगे। इसके अलावा मानसिक पीड़ा के लिए ₹1 लाख तथा वाद व्यय के लिए ₹10,000 का भुगतान भी करना होगा।
दूरगामी प्रभाव वाला फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारत में E-20 ईंधन नीति और वाहन निर्माताओं की जवाबदेही से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है। भविष्य में यदि किसी वाहन की E-20 संगतता को लेकर विवाद होता है, तो यह फैसला अन्य मामलों में भी संदर्भ के रूप में देखा जा सकता है।





