गरियाबंद। जिले के पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित 600 करोड़ रुपये से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने जिले को विकास की कई महत्वपूर्ण सौगातें दीं। इस अवसर पर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों ने अपने उत्पादों और पारंपरिक व्यंजनों का प्रदर्शन कर कार्यक्रम की विशेष आकर्षण बनीं।
कार्यक्रम स्थल पर जय मां संतोषी स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा लगाए गए स्टॉल में छत्तीसगढ़ की समृद्ध खान-पान संस्कृति की झलक देखने को मिली। समूह की महिलाओं ने मूंग बड़ा, चौसेला, अरसा, खुमरी और फरा जैसे पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन तैयार कर बिक्री के लिए उपलब्ध कराए। इन व्यंजनों को कार्यक्रम में पहुंचे जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, अतिथियों और आम नागरिकों ने खूब पसंद किया।
समूह की महिलाओं ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान उनके स्टॉल से 4 हजार रुपये से अधिक की बिक्री हुई, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हुई और उनके उत्साह में वृद्धि हुई।
इसके अलावा बिहान से जुड़ी अन्य महिला स्व-सहायता समूहों ने भी अपने मूल्य संवर्धित एवं हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन किया। महिलाओं द्वारा ब्लैक राइस, शुद्ध हल्दी, चूड़ियां, झुमके तथा अन्य घरेलू उत्पादों की बिक्री की गई। इन उत्पादों को भी लोगों से अच्छा प्रतिसाद मिला, जिससे समूहों की आमदनी बढ़ने के साथ-साथ उनके उत्पादों को नई पहचान मिली।
महिलाओं ने बताया कि बिहान योजना के माध्यम से उन्हें स्वरोजगार और आजीविका के बेहतर अवसर प्राप्त हुए हैं। इससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपने परिवार की आय में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि शासन की आजीविका संवर्धन योजनाएं ग्रामीण महिलाओं को अपनी प्रतिभा, कौशल और उत्पादों को बाजार से जोड़ने का अवसर प्रदान कर रही हैं।
महिला समूहों की सदस्यों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और आजीविका उन्नयन के लिए किए जा रहे प्रयास ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन पहलों से महिलाओं की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ उनके परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है।
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि शासन की योजनाओं से उन्हें आत्मविश्वास मिला है और वे अब रोजगार के नए अवसरों के साथ आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।





