मैनपुर। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व गरियाबंद अंतर्गत इंदागांव (धुरवागुड़ी) बफर परिक्षेत्र में वन विभाग की टीम ने अवैध शिकार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। वन अमले ने डुमाघाट के पास जंगल में घेराबंदी कर दो शिकारियों को रंगे हाथों दबोचा है। आरोपियों के पास से 3 मृत जंगली मुर्गे (झार कुकरी) और शिकार में प्रयुक्त 53 फीट लंबा जीआई तार का फंदा जब्त किया गया है। दोनों आरोपियों को प्रथम श्रेणी न्यायालय देवभोग में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जिला जेल गरियाबंद भेज दिया है।
मुखबिर की सूचना पर जंगल में की गई घेराबंदी
वन विभाग को गोपनीय सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति ग्राम डुमाघाट के पास जंगल में अवैध शिकार (खेदा) के इरादे से घुसे हैं। सूचना मिलते ही उप निदेशक उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व एवं सहायक संचालक उदंती (मैनपुर) के निर्देश पर विशेष गश्ती दल गठित किया गया। टीम ने फरसरा बीट के कक्ष क्रमांक 1213 में सघन सर्चिंग शुरू की। इस दौरान जंगल में संदिग्ध रूप से घूम रहे दो युवकों को घेराबंदी कर पकड़ा गया।
प्लास्टिक बोरी की तलाशी में मिले मृत पक्षी और फंदा
पकड़े गए आरोपियों ने अपना नाम हलधर गोंड़ (पिता छोटा गोंड़) एवं दिलेर गोंड़ (पिता जलधर गोंड़), दोनों निवासी ग्राम डुमाघाट बताया। जब उनके पास मौजूद सफेद प्लास्टिक की बोरी की तलाशी ली गई, तो उसमें 3 नग मृत जंगली मुर्गे और 53 फीट लंबा तार का फंदा बरामद हुआ। कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने जंगल में फंदा लगाकर जंगली मुर्गियों का शिकार किया था।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज
आरोपियों के खिलाफ वन परिक्षेत्र कार्यालय इंदागांव बफर में पी.ओ.आर. प्रकरण क्रमांक 17/424 दर्ज किया गया। इसके बाद वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर दोनों को जेल दाखिल कराया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध शिकार, कटाई व अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
टीम वर्क : कार्रवाई में इनकी रही सराहनीय भूमिका
इस त्वरित कार्रवाई में वन परिक्षेत्र अधिकारी (इंदागांव बफर) सुशील कुमार सागर, सहायक परिक्षेत्र अधिकारी राकेश सिंह परिहार, विवेचना अधिकारी व वनपाल भूपेन्द्र कुमार सोनी, वनरक्षक रोहित कमरो, रुस्तम यादव सहित पुनीत राम ध्रुव, देवीसिंग यादव, तुलाराम नेताम और गिरधारी बिसी की सक्रिय भूमिका रही।

