नई दिल्ली:भारत के सैन्य इतिहास में ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) एक ऐसा निर्णायक अभियान है, जिसने स्पष्ट कर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की है। हाल ही में 27 जून 2026 को प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी किए गए एक स्पष्टीकरण के बाद यह ऐतिहासिक ऑपरेशन फिर से चर्चा में आ गया है। आइए तथ्यों के आधार पर समझते हैं कि यह ऑपरेशन क्या था, क्यों शुरू हुआ और इसके क्या रणनीतिक परिणाम रहे।
ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि: पहलगाम आतंकी हमला
इस बड़े सैन्य अभियान की नींव अप्रैल 2025 में पड़ी थी। कश्मीर के पहलगाम (Pahalgam) में आतंकियों ने निहत्थे नागरिकों पर एक कायराना हमला किया था, जिसमें 26 मासूम नागरिकों (25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक) की जान चली गई थी। इस बर्बर हमले के बाद भारत सरकार ने कूटनीतिक अपीलों के बजाय एक सीधा और दंडात्मक सैन्य विकल्प (Punitive Military Action) चुनने का फैसला किया।
7 मई 2025: जब भारत ने लॉन्च किया ‘ऑपरेशन सिंदूर’
हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए 7 मई 2025 को भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की। यह भारत का एक अभूतपूर्व त्रि-स्तरीय सैन्य अभियान (Tri-service Operation) था, जिसमें थल सेना, वायु सेना और नौसेना ने पूरी तरह से समन्वय के साथ काम किया।
सटीक एयरस्ट्राइक: भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoJK) के अंदर मौजूद लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और हिजबुल मुजाहिदीन (HuM) के 9 बड़े आतंकी ठिकानों (Launchpads) पर मिसाइल और हवाई हमले किए। इस दौरान नूर खान और रहीमयार खान जैसे पाकिस्तानी एयरबेस को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया।
नुकसान का आंकड़ा: इस पूरी कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादियों और पाकिस्तानी सैनिकों को ढेर कर दिया गया।
नौसेना की घेराबंदी: इस दौरान भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने अपने कैरियर बैटल ग्रुप (CBG) और मिग-29K फाइटर जेट्स के जरिए समुद्री सीमा पर पूरी तरह से अपना दबदबा बनाए रखा, ताकि मकरान तट की ओर से कोई भी पाकिस्तानी घुसपैठ न हो सके।
पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई और भारत का एयर डिफेंस
भारत के इस प्रहार के बाद पाकिस्तान ने 7 से 10 मई के बीच भारतीय एयरबेस पर ड्रोन और UCAV से हमले करने का प्रयास किया। लेकिन भारत के स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे- आकाश मिसाइल) ने पाकिस्तान के सभी हवाई हमलों को हवा में ही नाकाम कर दिया।
गैर-सैन्य कूटनीतिक प्रहार: पानी और व्यापार पर रोक
ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ मिसाइलों तक सीमित नहीं था। भारत ने पाकिस्तान को आर्थिक रूप से पंगु बनाने के लिए दो बड़े कूटनीतिक प्रहार किए:
सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) का निलंबन: भारत ने 1960 की इस संधि को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया, जिससे पाकिस्तान में जल संकट और कृषि को भारी नुकसान की स्थिति पैदा हो गई।
अटारी-वाघा बॉर्डर सील: भारत ने पाकिस्तान के साथ अपना द्विपक्षीय व्यापार पूरी तरह रोक दिया और इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट अटारी को बंद कर दिया, जिससे पाकिस्तान की चरमराती अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लगा।
वर्तमान विवाद और रक्षा मंत्रालय का स्पष्टीकरण (जून 2026)
हाल ही में सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री के 28 जुलाई 2025 के संसदीय भाषण के एक हिस्से को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा था। यह अफवाह फैलाई गई कि रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सैनिकों के हताहत न होने की बात कही थी।
इस पर रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) ने 27 जून 2026 को स्पष्ट किया है कि रक्षा मंत्री का वह बयान सिर्फ उस फर्जी खबर का खंडन था, जिसमें कहा जा रहा था कि ऑपरेशन में भारतीय पायलट मारे गए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस ऐतिहासिक ऑपरेशन में जिन वीर जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी, उनके नाम पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) में दर्ज किए गए हैं और सरकार उनके परिवारों की पूरी जिम्मेदारी उठा रही है।
ऑपरेशन सिंदूर ने 1971 के बाद पहली बार भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य शक्ति के अंतर को स्पष्ट रूप से स्थापित कर दिया। यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा की हो, तो भारत कड़े और निर्णायक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।





