नई दिल्ली। भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) में कर्मचारियों और विभिन्न यूनियनों ने उत्तराखंड सर्किल में लागू किए जा रहे रिस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) पायलट प्रोजेक्ट का विरोध तेज कर दिया है। यूनियनों का कहना है कि कर्मचारियों से पर्याप्त चर्चा किए बिना लागू की गई यह योजना शहरी क्षेत्रों में सेवाओं और राजस्व पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।
यूनियनों ने मांग की है कि उत्तराखंड पायलट परियोजना को तत्काल वापस लिया जाए और कर्मचारियों की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाए। उनका आरोप है कि पुनर्गठन से तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती का संतुलन बिगड़ेगा, जिससे शहरी नेटवर्क संचालन प्रभावित हो सकता है।
तीसरे वेतन संशोधन को जल्द लागू करने की मांग
ऑल यूनियंस एंड एसोसिएशंस ऑफ BSNL (AUAB) ने तीसरे वेतन संशोधन (3rd PRC) को शीघ्र लागू करने की भी मांग उठाई है। यूनियनों का कहना है कि वेतन संशोधन से जुड़े प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जाए और कर्मचारियों की लंबित मांगों का जल्द समाधान किया जाए। इस संबंध में यूनियन प्रतिनिधियों ने दूरसंचार विभाग (DoT) के अधिकारियों से भी मुलाकात कर अपनी मांगें रखी हैं।
विरोध प्रदर्शन जारी
कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में ब्लैक बैज पहनने, लंच-आवर प्रदर्शन, धरना और ज्ञापन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए हैं। साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय और दूरसंचार विभाग से हस्तक्षेप कर कर्मचारियों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की गई है।
यूनियनों का कहना है कि सीमित संसाधनों और कर्मचारियों की कमी के बावजूद BSNL के कर्मचारी देश के ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में दूरसंचार सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि वेतन संशोधन और मानव संसाधन संबंधी समस्याओं का समाधान कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ BSNL को एक मजबूत सार्वजनिक दूरसंचार संस्था के रूप में सशक्त करेगा।


